
बिनोद बाबू संघर्ष और चेतना के प्रतीक: कुलपति
धनबाद के बीबीएमकेयू मेन कैंपस में बिनोद बिहारी महतो की पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम में वीसी प्रो. रामकुमार सिंह और अन्य अधिकारियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। वक्ताओं ने बिनोद बाबू के संघर्ष और विचारों को याद किया, और छात्रों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप गीत प्रस्तुत किया।
धनबाद, मुख्य संवाददाता बीबीएमकेयू धनबाद मेन कैंपस भेलाटांड़ में गुरुवार को बिनोद बिहारी महतो की पुण्यतिथि मनाई गई। कैंपस में स्थापित उनकी प्रतिमा पर वीसी प्रो. रामकुमार सिंह, रजिस्ट्रार डॉ राधानाथ त्रिपाठी, अधिकारियों, डीन समेत अन्य ने पुष्प अर्पित किया। वीसी ने कहा कि बिनोद बाबू एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे। संघर्ष और चेतना के प्रतीक हैं। आज उनके सपनों को उन्हीं के नाम से स्थापित विश्वविद्यालय पूरा कर रहा है। शिक्षा का दीप जो उन्होंने जलाया था, उसकी रोशनी अब समूचे झारखंड में फैल रही है। मुख्य वक्ता जगत महतो ने कहा कि मैंने बिनोद बाबू के साथ रहते हुए उनके कार्यों को देखा है।
वे अन्याय के खिलाफ और विस्थापितों के हक के लिए लड़ते थे। आर्ट एंड कल्चर विभाग के छात्रों ने बिनोद बाबू तोहर चरने प्रणाम गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं में शिक्षकों ने बिनोद बाबू पर वक्तव्य दिया। इनमें कुलसचिव डॉ राधानाथ त्रिपाठी ने उड़िया भाषा में, उमेश कुमार हिन्दी, जय गोपाल मंडल बांग्ला, डॉ गौरी मुंडा संथाली, डॉ अजय कुमार संस्कृत, डॉ मुकुंद रविदास खोरठा, मौसूफ अहमद ने उर्दू में अपनी बात रखी। मौके पर डॉ पुष्पा कुमारी छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष, डॉ कौशल कुमार प्रॉक्टर, डॉ आरके तिवारी सीसीडीसी, आर्ट एंड कल्चर हेड डॉ ताप्ति चक्रवर्ती समेत अन्य मौजूद थे।

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