
झारखंड, बिहार, यूपी में सुपरफास्ट और महाराष्ट्र पहुंचते ही बन जाती है एक्सप्रेस
धनबाद से कोल्हापुर जाने वाली दीक्षाभूमि एक्सप्रेस, जो 2584 किलोमीटर की यात्रा करती है, में यात्रियों को सुपरफास्ट चार्ज और अधिक किराया देना पड़ रहा है। यह ट्रेन आधे रास्ते पर सुपरफास्ट और आधे पर साधारण एक्सप्रेस बनती है। हालांकि, इस ट्रेन में पेंट्रीकार की सुविधा नहीं है।
धनबाद, रविकांत झा धनबाद से सबसे लंबी दूरी का सफर तय करने वाली दीक्षाभूमि एक्सप्रेस अनोखी ट्रेन है। धनबाद-छत्रपति साहूजी महाराज कोल्हापुर दीक्षाभूमि एक्सप्रेस झारखंड, बिहार, यूपी और मध्य प्रदेश में सुपरफास्ट बन कर दौड़ती है और महाराष्ट्र पहुंचते ही यह ट्रेन एक्सप्रेस बन जाती है। दीक्षाभूमि एक्सप्रेस में धनबाद से लेकर नागपुर स्टेशन तक किसी भी स्टेशन से आगे की यात्रा के लिए टिकट लेने पर यात्रियों को अधिक बेस किराए के साथ-साथ सुपरफास्ट चार्ज देना पड़ रहा है जबकि नागपुर के ठीक बाद वाले सेवाग्राम स्टेशन से आगे की यात्रा के लिए एक्सप्रेस का किराया यानी सुपरफास्ट का चार्ज नहीं लिया जाता है।
वापसी में कोल्हापुर से नागपुर के बीच हर स्टेशन के लिए एक्सप्रेस का किराया और नागपुर से धनबाद की तरफ आनेवाली ट्रेन में किसी भी स्टेशन तक के लिए किराए के साथ सुपरफास्ट चार्ज देना पड़ता है। दीक्षाभूमि एक्सप्रेस ऐसी ट्रेन है, जो आधे रूट पर सुपरफास्ट और आधे पर साधारण एक्सप्रेस बनकर चल रही है। यह ट्रेन सर्वाधिक 2584 किलोमीटर का सफर तय करती है। धनबाद से सेवाग्राम की दूरी 1446 किलोमीटर है। सेवाग्राम से इस ट्रेन में किसी भी स्टेशन के लिए टिकट बुक करने पर न तो यात्रियों को अधिक बेस किराया देना पड़ता है और न ही सुपरफास्ट चार्ज। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि रेलवे सिर्फ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के यात्रियों पर अधिक बेस कराया और सुपरफास्ट चार्ज का बोझ क्यों लाद रहा है। --- 150 से 500 तक देना पड़ रहा अधिक किराया दीक्षाभूमि को सुपरफास्ट का दर्जा मिलने से धनबाद के यात्रियों को कोल्हापुर तक जाने में स्लीपर क्लास में करीब 150 रुपए, थर्ड एसी में 350 और सेकंड एसी में करीब 510 रुपए अधिक किराया चुकाना पड़ा रहा है। अलग-अलग स्टेशनों के लिए किराए के मद में घाटा अलग-अलग है। --- बिना नंबर बदले सुपरफास्ट बन गई दीक्षाभूमि एक्सप्रेस भारतीय रेलवे में सुपरफास्ट और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के नंबर अलग-अलग होते हैं। 12 और 22 नंबरों से शुरू होने वाली ट्रेनों को यहां सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा प्राप्त है। 11, 13, 14, 15, 16, 18 और 19 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेनें एक्सप्रेस ट्रेनें होती हैं। दीक्षाभूमि एक्सप्रेस का नंबर 11045-11046 है। यानी दीक्षाभूमि एक्सप्रेस का नंबर 11 से शुरू होता है, इसलिए इस ट्रेन को एक्सप्रेस माना जाना चाहिए। बिना नंबर बदले रेलवे ने दीक्षाभूमि एक्सप्रेस में सुपरफास्ट का किराया वसूल रहा है। सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे होनी चाहिए, लेकिन दीक्षाभूमि एक्सप्रेस की औसत गति 50 किमी प्रति घंटे ही है। --- सबसे लंबी दूरी की ट्रेन, फिर भी नहीं है पेंट्रीकार धनबाद-कोल्हापुर दीक्षाभूमि एक्सप्रेस से धनबाद से खुलने वाली सबसे लंबी दूरी वाली ट्रेन है। धनबाद से चलने वाली एलेप्पी एक्सप्रेस 2535 किलोमीटर चलती है जबकि धनबाद-कोल्हापुर दीक्षाभूमि एक्सप्रेस 2584 किलोमीटर का सफर तय कर अपनी मंजिल तक पहुंचती है। इतनी लंबी दूरी तय करने में दीक्षाभूमि एक्सप्रेस को 50 घंटे लगते हैं। लंबा सफर होने के बाद भी रेलवे ने दीक्षाभूमि एक्सप्रेस में पेंट्रीकार की सुविधा नहीं दी है। इसी साल जुलाई महीने से ट्रेन में एलएचबी बोगियां जोड़ी जा रही हैं।

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