
देश के खनन भविष्य का नेतृत्व करे धनबाद: कोयला मंत्री
केंद्रीय कोयला व खनन मंत्री जी किशन रेड्डी ने आईआईटी आईएसएम धनबाद में भावी इंजीनियरों को संबोधित करते हुए कहा कि धनबाद को विश्वस्तरीय खनन नेतृत्व का केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत सरकार तकनीकी विकास और अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध है और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठा रही है।
धनबाद, मुख्य संवाददाता केंद्रीय कोयला व खनन मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को आईआईटी आईएसएम धनबाद के पेनमेन हॉल में भावी इंजीनियरों व शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आईआईटी आईएसएम धनबाद भारत के खनन भविष्य का नेतृत्व करें। आने वाले वर्षों में न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर खनन नेतृत्व धनबाद से उभरना चाहिए। आईआईटी धनबाद भारत खनन क्षेत्र में प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसने देश को प्रतिभाशाली इंजीनियर, नवीन विचार, अत्याधुनिक तकनीक और खनन क्षेत्र के लिए दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान किया है। यह संस्थान भारत के खनन भविष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मंत्री ने कहा कि जब प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत के प्रमुख कोयला एवं खनन केंद्रों से आगे बढ़ेंगे, तब न केवल देश का खनन क्षेत्र सशक्त होगा, वैश्विक मंच पर एक नई पहचान भी बनाएगा। टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और नवाचार आधारित पहल खनन क्षेत्र को तकनीक-संचालित और भविष्य के अनुरूप बना रही है। भारत सरकार शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर सुधार, अनुसंधान और तकनीकी विकास को निरंतर समर्थन देती रहेगी। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके लिए माइनिंग को वर्ल्ड क्लास बनाना आवश्यक है, जिसमें बुनियादी विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान प्रमुख स्तंभ होंगे। क्रिटिकल मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) मिशन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत अभी अधिकांश क्रिटिकल मिनरल्स का आयात करता है, लेकिन आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सरकार ने लगभग ₹32,000 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। इसमें अन्वेषण, खनन, प्रौद्योगिकी विकास, अधिग्रहण और रिसाइक्लिंग शामिल हैं। इस दिशा में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज तकनीकी विकास, अनुसंधान, सुधारों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पेटेंट फाइलिंग में अग्रणी बन रहा है। रेड्डी ने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। कोयला उत्पादन पहली बार एक अरब टन के पार पहुंचा है। ड्रोन, जीपीएस, डेटा-ड्रिवन और प्रिडिक्टिव सिस्टम के माध्यम से खनन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाया जा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि कार्बन न्यूट्रल माइंस, एडवांस अंडरग्राउंड माइनिंग, ऑटोमेशन, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच समन्वय आवश्यक है। मौके पर आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा, कोल इंडिया के चेयरमैन बी साई राम, आईआईटी के उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार समेत अन्य मौजूद थे।

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