काम के दबाव में आकर मेडिकल रिप्रजेंटेटिव फंदे से लटका
पटना के वेद नगर में 26 वर्षीय चिराग लक्ष्मी ने काम के दबाव के कारण आत्महत्या कर ली। माता-पिता के अनुसार, वह एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के रूप में कार्यरत था। घर पर लौटने पर परिवार ने उसे पंखे से लटका पाया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पटना वेद नगर रुकनपुरा श्याम पैलेस निवासी चिराग लक्ष्मी (26 वर्ष) ने गुरुवार को चिरागोड़ा बिनोद बिहारी महतो के घर के सामने एक किराए के मकान में फांसी लगा ली। गमछे के सहारे फंदे से झूल कर चिराग ने जान दे दी। वह अपने माता-पिता का इकलौता चिराग था। पिता कुंदन कुमार ने बताया कि जनवरी महीने से उनका पुत्र एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) के रूप में कार्यरत था। उन्होंने आरोप लगाया कि काम के दबाव के कारण बेटे ने आत्मघाती कदम उठा लिया। चिराग की मां ज्योति सिन्हा ने पुलिस को दिए शिकायत में बताया कि प्रेम सिंह के घर में उनका पुत्र किराए पर रहता था। सुबह करीब साढ़े नौ बजे मृतक की मां ज्योति और पिता कुंदन कुमार जयप्रकाश नगर त्रिवेणी अपार्टमेंट निवासी मृतक के मामा के घर गए थे।
परिवार की प्रतिक्रिया
घर पर कुछ कुंदन का खाना छूट जाने के कारण माता-पिता वापस करीब सवा 10 बजे लौटे तो देखा कि पुत्र की बाइक घर के बाहर खड़ी थी। घर का दरवाजा बंद था। काफी आवाज लगाने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो मुख्य दरवाजे को तोड़ कर वे लोग अंदर घुसे तो बगल के कमरे में चिराग लक्ष्मी को पंखे के सहारे गमछे से लटका पाया। इसके बाद माता-पिता फफक कर रोने लगे। आसपास के लोग दौड़े और गमछा काट कर शव को नीचे उतारा गया। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव को उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
आवश्यक कार्रवाई की मांग
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कार्रवाई हो, ताकि किसी भी बाप को बेटे की अर्थी का बोझ न उठाने पड़े...
मृतक के पिता कुंदन कुमार ने मौके पर पहुंचे पत्रकारों को बताया कि पहले महीने से ही कंपनी के प्रतिनिधि दबाव डालते थे। दवा के सैंपल बेचवाते थे। एक्सपेंस का पैसा भी कंपनी वाले ले लेते थे। माल बेचने के लिए जेब से पैसा लेते थे। रात में कभी भी बुला लेते थे। कंपनी के लोगों पर इतनी कड़ी कार्रवाई की जाए कि भविष्य में किसी बाप को अपने बेटे की अर्थी का बोझ नहीं उठाना पड़े। इधर, मां ने धनबाद थाना में दिए शिकायत में बताया कि बेटे की मौत फांसी लगाने से हुई है, उन्हें किसी पर शक नहीं है। पुलिस मृतक के मोबाइल की जांच कर रही है। हालांकि मामले में अप्राकृतिक मौत की प्राथमिकी दर्ज की गई है। पिता कुंदन किडनी के मरीज हैं। उनका पटना में किडनी ट्रांसप्लांट होना था। वे लोग पटना जाने के लिए ही निकले थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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