DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   झारखंड  ›  धनबाद  ›  कोरोना के कहर से संकट में मासूमों का भविष्य

धनबादकोरोना के कहर से संकट में मासूमों का भविष्य

हिन्दुस्तान टीम,धनबादPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 05:10 AM
कोरोना के कहर से संकट में मासूमों का भविष्य

धनबाद, कार्यालय संवाददाता

कोरोना ने लाखों लोगों की जीवन में तबाही ला दी है। किसी की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी तो कोई भोजन को मोहताज हो गया। इन सबके बीच उन मासूमों पर महामारी का व्यापक असर पड़ा है, जिनके सिर से कोरोना ने माता या पिता का साया छीन लिया है। हिन्दुस्तान की टीम ने ऐसे ही परिवार की पड़ताल की। पड़ताल के दौरान जो स्थिति सामने देखी गई, वह मानवीय संवदनाओं को हिला देने वाली है।

पति को खोया, बच्चों की परवरिश की चिंता

छह साल की एलिजाबेथ अपनी सात माह की बहन स्वीटी टूडू के साथ खाट पर खेल रही है। एलिजा को इतना बताया गया है कि उनके पिता बहुत दूर चले गए हैं। वह इससे अनजान है कि पिता अब कभी उसके पास लौट कर नहीं आएंगे। पांच मई 2021 को ही कोरोना ने एलिजा और स्वीटी से उसके पिता को छीन लिया। मासूम बच्चियों की मां सुनीता किस्कू बताती है कि उनके पति अनिल टूडू मिशन ऑफ चैरिटी मेमको मोड़ में चालक थे। पिछले दिनों अचानक उनकी तबीयत थोड़ी खराब हुई। एक-दो दिनों तक तो घर में ही पड़े रहे। बाद में जब जांच कराई तो पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव है। इस रिपोर्ट ने तो उनकी जिंदगी ही बर्बादी कर दी। पति के जाने के बाद किसी तरह खुद को संभाल पायी, लेकिन अब रहने-खाने और बच्चों की परवरिश की चिंता है। बताया कि पति के साथ वह कई सपने लेकर अपने पैतृक गांव बेंगाबाद गिरिडीह से धनबाद आयी थी। यहां आने के बाद पति को काम भी मिल गया। कमाई भले कम थी लेकिन खुशी से जीवन गुजर रहा था। अभी छह माह पूर्व ही स्वीटी के रूप में नई खुशियां आई थी, लेकिन एक बारगी ही सबकुछ उजड़ गया। स्वीटी के दूध और खुद के निवाले के लिए दूसरों की मदद पर ही आश्रित है। फिलहाल मेमको मोड़ में उनके मकान मालिक दिनेश रॉबिंसन ने भाड़ा माफ कर दिया है तो वहीं मिशन ऑफ चैरिटी द्वारा उन्हें कुछ अनाज प्राप्त हो रहा है।

कमाऊ सदस्य को खोने के बाद टूटा दुखों का पहाड़

पटना में एक निजी कंपनी में काम करनेवाले माहेश्वरी ठाकुर के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बलियापुर रंगामाटी के रहनेवाले माहेश्वरी की मौत 11 अप्रैल को कोरोना से हो गयी थी। वे घर के अकेले कमाऊ सदस्य थे। अपने पीछे पत्नी सरिता ठाकुर और तीन बच्चे जिनमें दो नाबालिग हैं, को छोड़ गए हैं। सविता बताती हैं कि जिस निजी कंपनी में काम करते थे, वहां न पीएफ की व्यवस्था थी न ग्रेच्युटी की। जो महीना मिलता था, उसी से गुजारा होता था। लेकिन उनके जाने के बाद मानों सबकुछ अंधकारमय हो गया है। रिश्तेदारों से मिल रही मदद के भरोसे घर चल रहा है।

बच्चों की पढ़ाई और भोजन की चिंता

कतरास बाघमारा ब्लॉक के रखाल ठाकुर का भी कोरोना से निधन हो गया। बीआरपी का काम करनेवाले रखाल के गुजर जाने के बाद उनके परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। अपने पीछे पत्नी निशा देवी और दो नाबालिग बच्चे 12 साल के अभय और 14 साल की सिम्मी को छोड़ गए हैं। निशा बताती हैं कि पति बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी संजीदा थे। लेकिन उनके जाने के बाद बच्चों का भविष्य भी अंधकार लगने लगा है, क्योंकि यहां तो अब भोजन पर भी आफत है। 26 अप्रैल को उनकी मृत्यु हुई। कुछ दिन तो दुख और संताप में गुजर गए। अब खुद को संभाल कर खड़ी हुई तो करोना काल में आगे कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा। हमारी स्थिति देखकर पड़ोसियों-रिश्तेदारों ने सीएम कार्यालय के टोल फ्री नंबर पर फोन कर व्यथा सुनाई, लेकिन मदद के नाम पर अभी तक कुछ नहीं मिला है।

बच्चों के पोषण के लिए मां को मिलेगी सामजिक सुरक्षा

ऐसे बच्चों के पोषण के लिए बाल संरक्षण विभाग की ओर से मां को सामाजिक सुरक्षा के तहत पहले राशन कार्ड इसके बाद विधवा पेंशन सहित अन्य योजनाओं से जोड़ा जाएगा। सहायता किट प्रदान की जाएगी। इससे पूर्व विभाग द्वारा अधिकांश पीड़ित बच्चों का होम वेरिफिकेशन किया जा चुका है। समय- समय पर इनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति का ऑडिट किया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि ये सब विभागीय कार्यवाही पूरी होने में काफी समय लगेगा, जबकि इन लोगों को तत्काल मदद की जरूरत है।

संबंधित खबरें