ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ झारखंड धनबादकुटुम्ब ने रेल ठेकेदार बबलू सिंह पर बरसाई थीं गोलियां

कुटुम्ब ने रेल ठेकेदार बबलू सिंह पर बरसाई थीं गोलियां

कुसुम विहार के रेल ठेकेदार लव कुमार उर्फ बबलू सिंह की हत्या के लिए दो शूटरों को धनबाद बुलाया गया था। काले रंग की अपाची बाइक से कुटुम्ब और शुक्ला...

कुटुम्ब ने रेल ठेकेदार बबलू सिंह पर बरसाई थीं गोलियां
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,धनबादFri, 15 Apr 2022 01:41 AM
ऐप पर पढ़ें

धनबाद, मुख्य संवाददाता

कुसुम विहार के रेल ठेकेदार लव कुमार उर्फ बबलू सिंह की हत्या के लिए दो शूटरों को धनबाद बुलाया गया था। काले रंग की अपाची बाइक से कुटुम्ब और शुक्ला नामक शूटर दो अप्रैल की शाम फुसबंगला रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचे। बबलू सिंह के बिल्कुल सामने जाकर कुटुम्ब ने 7.65 बोर के पिस्टल से उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है।

पुलिस को जानकारी मिली है कि बबलू की हत्या में कुल सात लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका है। मुजफ्फरपुर धनौर कटरा निवासी जुगनू सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिंह, सीतामढ़ी मीरा नगर महिंदवारा निवासी अजीत कुमार और जोड़ापोखर डुमरी दो नंबर निवासी मनोज कुमार ने हत्या की योजना बनाई थी। मनोज के कहने पर डुमरी दो नंबर निवासी राजीव कुमार रजक ने बबलू सिंह की रेकी की। मनोज ने ही यूपी आजमगढ़ के बेतपुर जहानागंज आमदही निवासी राम बिलास चौहान से बबलू की हत्या के लिए हथियार लिया था। इन आरोपियों में से मनोज कुमार, राम बिलास और राजीव को पुलिस जेल भेज चुकी है। बाकी चार आरोपियों का पुलिस टोह ले रही है। शूटरों के असली नामों को खुलासा अभी नहीं हो सका है।

टेंडर के पांच प्रतिशत के खेल में थे तीन हिस्सेदार

मनोज कुमार की गिरफ्तारी से पुलिस को बबलू सिंह की हत्या के संबंध में कई जानकारियां मिली हैं। मनोज ने पुलिस को बताया कि अजीत और जुगनू के साथ मिल कर उसने आद्रा रेल मंडल के ठेके के लिए एक सिंडिकेट बनाया था। वे लोग पैक्टर की भूमिका अदा करते थे। सबका काम बंटा हुआ था। अजीत ठेकेदारों को चिह्नित कर टेंडर डालने से रोकता था और सेंटिग के अनुसार ही सिंगल हाईरेट वाला टेंडर डलवाता था। इसके एवज में पूरे टेंडर की राशि का पांच प्रतिशत उन्हें मिलता था। इस पांच प्रतिशत में अजीत और उसका 30-30 प्रतिशत और जुगनू का 40 प्रतिशत हिस्सा तय था।

माफिया का दामन छोड़ बनाया था अपना गैंग

मनोज ने पुलिस को बताया है कि 2012 में कृष्णा सिंह को अमलाबाद बिरसा पुल के पास पप्पू लंगड़ी, नौशाद व काके सरदार आदि के साथ मिल कर ठेका विवाद में गोली मारी थी। इस केस में जेल गया तो जेल में जुगनू से मुलाकात हुई थी। जुगनू माफिया अवधेश सिंह और वह जीतेंद्र पांडेय के लिए काम करता था। जेल में ही तय हुआ था कि दोनों मिल कर ठेका मैनेज करने का नया गैंग बनाएंगे। डेढ़ दो साल बाद दोनों जेल से निकले तो जुगनू अजीत को लेकर धनबाद आया और तीनों मिल कर ठेके में पैक्टर का काम करने लगे।

तमाम धमकियों के बाद भी नहीं डिगा बबलू

बबलू सिंह 2018 से ही रेल ठेका ले रहा था। उसने रेलवे ट्रैक के काम में लो रेट पर टेंडर डाल कर सेटिंग को गड़बड़ा दिया था। इससे कई ठेकेदार विदक रहे थे। ठेकेदारों पर गैंग का भय कम होने लगा। 2018 में अजीत ने बबलू को फोन पर धमकी दी, लेकिन वह नहीं माना। इस पर मनोज ने उसके घर पर 2019 में फायरिंग भी की थी। तब भी बबलू सिंह नहीं डिगा और न ही सिंडिकेट का हिस्सा नहीं बना।

कंबाइंड बिल्डिंग के रेस्टूरेंट में बनी थी हत्या की योजना

हाल के दिनों में बबलू ने एक जोनल वर्क में लो रेट डाल कर काम ले लिया। इससे सिंडिकेट पूरी तरह से बिखरने लगा। अक्तूबर-नवंबर में जुगनू, अजीत और मनोज ने कंबाइंड बिल्डिंग के एक रेस्टूरेंट में बबलू की हत्या की योजना बनाई। इस मीटिंग में शूटर कुटुम्ब भी था। जुगनू ने उसका परिचय अपने रिश्तेदार के रूप में कराया था। शुक्ला को कुटुम्ब लेकर आया था। योजना के अनुसार 30 हजार रुपए और नौकरी का लालच देकर राजीव कुमार बबलू की रेकी के काम में लगाया था।

होली के पहले कई बार पीछा किया, नहीं मिली सफलता

पुलिस को मनोज ने बताया कि होली के पहले से बबलू की हत्या का प्रयास किया जा रहा है। कई बार उसका पीछा किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी बीच पता चला कि वह हर शनिवार को लेबर पेमेंट के लिए फुस बंगला क्रॉसिंग आता है। इसलिए वहीं उसकी हत्या करने की प्लानिंग बनी। झरिया का डबलू पटाखावाला को हत्या की प्लानिंग की जानकारी थी।

तीन गाड़ियों से पहुंचे थे हत्यारे

दो अप्रैल को बबलू की हत्या के लिए मनोज सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंच कर मंडरा रहा था। इसी बीच बाइक से कुटुम्ब और शुक्ला पहुंचा। पीछे से राजीव रजक भी स्कूटी से वहां आया। मनोज ने दोनों शूटरों को एक-एक लोडेड पिस्टल दिया। अजीत और जुगनू भी पहुंचे। बबलू घटना स्थल पर मजदूरों को पैसा बांट रहा था। मजदूरों की भीड़ घटते ही कुटुम्ब पास गया और बबलू पर कई राउंड फायरिंग की। बबलू गिर गया तो सभी वहां से भाग गए। हत्या के बाद शूटरों ने उसे हथियार वापस कर दिया था। जिसे पुलिस ने जब्त किया है।

epaper