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19 जनवरी, 2020|10:29|IST

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राष्ट्र कल्याण के लिए सदा तत्पर्य रहे: आचार्य दीनानाथ

राष्ट्र कल्याण के लिए सदा तत्पर्य रहे: आचार्य दीनानाथ

1 / 3जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में..., बिहारी घर मेरा वृज में बना दोगे तो क्या होगा...जैसे गीतों से कथा स्थल गूंज उठा। मौका था मनईटांड़ पुराना स्टेशन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन का। भक्ति...

राष्ट्र कल्याण के लिए सदा तत्पर्य रहे: आचार्य दीनानाथ

2 / 3जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में..., बिहारी घर मेरा वृज में बना दोगे तो क्या होगा...जैसे गीतों से कथा स्थल गूंज उठा। मौका था मनईटांड़ पुराना स्टेशन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन का। भक्ति...

राष्ट्र कल्याण के लिए सदा तत्पर्य रहे: आचार्य दीनानाथ

3 / 3जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में..., बिहारी घर मेरा वृज में बना दोगे तो क्या होगा...जैसे गीतों से कथा स्थल गूंज उठा। मौका था मनईटांड़ पुराना स्टेशन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन का। भक्ति...

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जीवन है बेकार भजन कर दुनिया में..., बिहारी घर मेरा बृज में बना दोगे तो क्या होगा...जैसे गीतों से शुक्रवार को कथा स्थल गूंज उठा। मौका था मनईटांड़ पुराना स्टेशन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन का। भक्ति के रस में डूबे श्रोताओं ने जयकारे लगे तो भक्ति गीतों पर खुद को झूमने से रोक नहीं सके। वृंदावन से आए कथावाचक आचार्य दीनानाथ ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। कहा कि समाज, राज्य, राष्ट्र के कल्याण के लिए शरीर को भी दान करना पड़े तो कर देना चाहिए। भारत के रक्षक सेना के जवान भी सर्वस्व दान कर देशवासियों की सुरक्षा में लगे हुए हैं।

समाज, राज्य व राष्ट्र के कल्याण के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए। कहा कि आचार्य ने भागवत कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद एक जीव है, इस जीव की दो पत्नियां सुरुचि एवं सुनीति। एक भक्ति का मार्ग बताती है, दूसरी उससे विमुख करती है। उन्होंने कहा कि सत्संग का जो फल है, वही ध्रुव कहलाता है।

भजनों पर झूमते रहे श्रोता

कथा के दौरान भजनों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भक्ति में तल्लीन होकर झूमने पर मजबूर कर दिया। आचार्य के श्री मुख से भजनों की सुरीली वाणी को सुनकर श्रद्धालु मंच के समीप आकर अभिवादन करते हुए भजनों पर झूमते रहे और कई श्रद्धालु अपने स्थान पर ही भजनों का आनंद लेते रहे।