srimad bhagwat katha - प्रभु आपसे मिल कर कोहिनूर हो गए DA Image

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प्रभु आपसे मिल कर कोहिनूर हो गए

प्रभु आपसे मिल कर कोहिनूर हो गए

1 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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2 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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3 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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4 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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5 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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6 / 6ज्ञान तभी टिकता है जब आप श्रद्धावान होते है। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहते लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते है। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटे है। इससे बचने की...

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ज्ञान तभी टिकता है, जब आप श्रद्धावान होते हैं। आज की स्थिति यह है कि कोई ज्ञान लेना नहीं चाहता लेकिन ज्ञान देना सभी चाहते हैं। हर इंसान अपने को सही और दूसरे को गलत साबित करने में जुटा है। इससे बचने की जरूरत है। उक्त बातें वृंदावन से आए कथावाचक गौरव कृष्ण गोस्वामी ने कही। वे गोल्फ ग्राउंड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को भक्तों को कथा का रसपान करा रहे थे। भक्ति की गंगा में श्रद्धालु डुबकी लगाते रहे।

सबों का संग है सत्संग

सत्संग के महत्व को बताते हुए गोस्वामी जी ने कहा कि कथा या भजन सुनना सत्संग नहीं है। बल्कि सबों का संग ही सत्संग है। जो आप को प्रभु से जोड़ दे, वह सत्संग है। सत्संग के अनेक प्रकार हैं। मानव को किसी भी तरह से भगवान से जुड़े रहना चाहिए।

कथा में बैठने से मिल जाती है मुक्ति

कथा में बैठने मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है। मुक्ति तो भक्ति की दासी है। धनवान या ज्ञानी बन गए पर प्रभु के चरण में नहीं गए तो आपका जीवन बेकार है।

क्रोध के बस में जाना गलत

क्रोध करना गलत नहीं, क्रोध के बस में चले जाना गलत है। क्रोध आए तो उसे रोकना नहीं, क्रोध करना लेकिन तीन बातों को ध्यान में रखकर। आंखें लाल नहीं हो, वाणी गलत नहीं हो और हाथ पैर का उपयोग नहीं करना।

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