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19 अक्तूबर, 2020|3:30|IST

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राष्ट्रीय वेबिनार में वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति पर उठाए सवाल

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बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के राजनीतिशास्त्र विभाग द्वारा नयी शिक्षा नीति और भारत के कमजोर वर्ग, चुनौतियां एवं संभावनाएं पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सेंटर फोर पॉलीटिकल स्टडीज के प्रो (डॉ) नरेंद्र कुमार ने कहा कि नयी शिक्षा नीति एक तरफ समावेशी और न्यायसम्य शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा को निजीकरण एवं बाजारीकरण के सुपुर्द करती है। इस तरह यह अपने आप में आत्मविरोधाभाषी है। भारतीय समाज की संरचना के मद्देनजर शिक्षा नीति हो ताकि समाज के हाशिए पर के लोगों को इसका लाभ मिल सके। डॉ कुमार ने कहा कि नयी शिक्षा नीति में प्राचीन भारतीय परंपराओं की पुनर्स्थापना पर भी फोकस है, जो अच्छी बात हो सकती है। लेकिन इसी प्राचीन भारतीय परंपराओं में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के शोषण की अमानवीय परंपरा भी शामिल है। नयी शिक्षा नीति में अच्छी-बुरी परंपरा में फर्क स्पष्ट होना चाहिए अथवा नयी शिक्षा नीति के तहत किस परंपरा को पुनस्थापित करने का लक्ष्य है, यह भी साफ होना चाहिए। बीएचयू के प्रो नागेंद्र कुमार ने स्कूली शिक्षा स्तर पर वोकेशनल शिक्षा लागू किए जाने की योजना पर कहा कि सरकारी स्कूलों में समाज के कमजोर वर्ग के बच्चे ही पढ़ते हैं। कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा स्किल डेवलपमेंट तक सिमट जाएगी, क्योंकि उच्च्तर शिक्षा महंगी होने के कारण उनके लिए उच्चतर शिक्षा हासिल कर पाना कठिन होगा।

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  • Web Title:Speakers raised questions on new education policy in national webinar