100-200 रुपए कमीशन के लिए नवजातों को पिलवा रहे डिब्बे का दूध
सदर अस्पताल में नवजात बच्चों को मां के दूध से वंचित कर डिब्बे का दूध पिलाने का मामला सामने आया है। परिजनों को बताया जाता है कि मां का दूध नहीं है, जबकि यह सब 100-200 रुपए के कमीशन के लिए किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मां का दूध बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सदर अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां जन्म लेने वाले नवजात बच्चों को मां के दूध से वंचित कर डिब्बे का दूध पिलाने का खेल खुलेआम चल रहा है। प्रसूताओं के परिजनों को यह कहकर गुमराह किया जाता है कि मां को दूध नहीं हो रहा, इसलिए बच्चे के लिए बाजार से दूध खरीदना जरूरी है। हैरानी की बात यह है कि यह सब महज 100-200 रुपए के कमीशन के लिए किया जा रहा है। अस्पताल के कुछ कर्मचारी कथित रूप से दवा दुकानदारों के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे हैं और नवजातों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं।सोमवार
को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के एक वार्ड में भर्ती 10 में से 9 प्रसूताएं अपने बच्चों को डिब्बे का दूध पिलाती मिलीं। परिजनों ने बताया कि उन्हें यही कहा गया कि मां का दूध नहीं उतर रहा। केवल एक प्रसूता ने दूध नहीं खरीदा। हालांकि उसे भी यही सलाह दी गई थी। शुक्रवार को भी इसी वार्ड की सभी 10 प्रसूताओं ने डिब्बे का दूध खरीद रखा था।यहां बेड संख्या 63 पर भर्ती भौंरा निवासी सुमन कुमारी के पति संतोष कुमार ने बताया कि प्रसव के बाद एक व्यक्ति आया और दूध, नैपकिन, महिलाओं के उपयोग के पैड व कुछ दवाएं देकर 705 रुपए ले गया। दूध के डिब्बे पर कीमत सिर्फ 170 रुपए अंकित थी। बाकी राशि अन्य सामान के नाम पर वसूली गई। संतोष के अनुसार सामान देने वाले ने कहा कि यह लेबर रूम से भेजा गया है। इस अस्पताल के लगभग सभी वार्डों की यही स्थिति है।मां का दूध नहीं आना बेहद दुर्लभविशेषज्ञों की मानें तो प्रसव के बाद मां का दूध नहीं आना बेहद दुर्लभ स्थिति है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और केवल गंभीर जटिलताओं, जैसे अत्यधिक रक्तस्राव या स्वास्थ्य समस्या में ही बाधित होती है। शनिवार को धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक वार्ड में सिजेरियन और नॉर्मल डिलीवरी वाली भर्ती 22 में सिर्फ एक प्रसूता का बच्चा डिब्बे का दूध पी रहा था। बाकी 21 को इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी जबकि सदर की स्थिति बिल्कुल उल्टी है।बच्चे के स्वास्थ्य के लिए मां का दूध जरूरीशहर की जानी-मानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ साधना के अनुसार मां का दूध नवजात के लिए अमृत के समान है और जन्म के तुरंत बाद मिलने वाला पहला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, अत्यंत पोषक होता है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। शिशु को कम से कम छह महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए। यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है।मैं खुद एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हूं। मां के दूध के महत्व को अच्छे से समझता हूं। सदर में यदि ऐसा हो रहा है तो गंभीर मामला है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।-डॉ संजीव कुमार प्रसाद, उपाधीक्षक, सदर असपताल धनबाद
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Amit Ranjanशॉर्ट बायो: अमित रंजन पिछले 18 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ में प्रिंसिपल कंटेंट क्रिएटर के पद पर कार्यरत हैं।
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अमित रंजन भारतीय प्रिंट और डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ और ‘लाइव हिन्दुस्तान’ प्रिंसिपल कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं। दिसंबर 2014 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने बदलते मीडिया ट्रेंड्स, डिजिटल ऑडियंस बिहेवियर और कंटेंट स्ट्रेटेजी पर मजबूत पकड़ बनाई है। तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित रिपोर्टिंग उनकी पहचान है।
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