Hindi NewsJharkhand NewsDhanbad NewsSevere Cold Affects Crop Production in Dhanbad Farmers Warn of Potential Losses
मौसम में बदलाव से सब्जी की फसलों पर संकट

मौसम में बदलाव से सब्जी की फसलों पर संकट

संक्षेप:

धनबाद में कड़ाके की ठंड से आलू, हरी सब्जियां और सरसों की फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि ठंड और नमी से फसलें प्रभावित हो रही हैं। यदि यह मौसम बना रहा तो उत्पादन घट सकता है। फसल को बचाने के लिए उचित उपायों की आवश्यकता है।

Jan 14, 2026 02:02 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
share Share
Follow Us on

अमन्या सुरेश धनबाद। धनबाद में लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड एक ओर जहां रबी मौसम में गेहूं की फसलों के लिए लाभकारी है। वहीं दूसरी ओर आलू, हरी सब्जी और सरसों की खेती पर प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। ठंड के साथ बढ़ते कुहासे और नमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। ढांगी बस्ती के किसानों ने बताया कि तेज हवा और बादलों की आवाजाही से सब्जी की फसलें प्रभावित हो रही हैं। यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा तो सरसों, आलू सहित अन्य सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

लगातार पड़ रही ठंड से फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, मटर और अन्य सब्जियों में सड़न और रोग लग रहे हैं। खेतों में नमी अधिक रहने से फंगल रोगों का भी खतरा बढ़ गया है, जिससे सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो रहे हैं। किसानों के अनुसार मौसम में नमी बढ़ने से माहू (एफिड) जैसे हानिकारक कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। यदि समय रहते इनपर नियंत्रण नहीं पाया गया तो फसल खराब होने का खतरा बना रहेगा। फसल पर ठंड का असर और बचाव के उपाय आलू : आलू की फसल को पाला और कोहरे से ज्यादा नुकसान हो रहा है, जिससे पत्तियां झुलस जा रही हैं और पौधे का बढ़ना रुक जा रहा है। कंद का विकास प्रभावित हो रहा है। आनेवाले दिनों में झुलसा रोग जैसी बीमारियां लग जाती हैं, जिससे पैदावार घट जाती है और फसल नष्ट हो सकती है। इससे बचाव के लिए हल्की सिंचाई, पराली या राख का धुआं, मल्चिंग और फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव जरूरी है। गोभी : गोभी की फसल को पाला, कम तापमान, कीट और रोगों (मृदुरोमिल आसिता, झुलसा, तना सड़न) से नुकसान हो रहा है, जिससे फूल छोटे रह जा रहे और पौधे मुरझा रहे हैं। अधिक नमी या सूखा भी जड़ों को गला सकता है और गुणवत्ता खराब कर सकता है। बचाव के लिए उचित रोपाई, संतुलित पोषण और दवा का छिड़काव जरूरी है। सरसों : सरसों की फसल को पाला (झुलसा रोग), अधिक नमी और कोहरे से माहू (लाही) कीट, झुलसा रोग (ब्लैक स्पॉट) और सफेद रतुआ जैसे कीट व फंगल रोगों से नुकसान हो रहा है। इससे पौधे की वृद्धि रुकती है, पत्तियां झुलसती हैं, फूल गिरते हैं और फलियां ठीक से नहीं बन पातीं, जिससे पैदावार घट जाती है। गेहूं : गेहूं की फसल को पाला और कोहरे से नुकसान हो रहा है, जिससे पौधे में पीलापन, कल्ले न निकलना, ग्रोथ रुकना, पत्तियों का मुरझाना और तनों के कमजोर होने से टूटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। वहीं पाला पत्तियों के निकलने या दाना भरने के समय पड़े तो उपज घट जाती है। मटर : मटर की फसल को पाला और घने कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जिससे पौधे झुलसकर पीले पड़ जा रहे हैं, पत्तियां सिकुड़ती जा रही हैं, फूल-फल गिर जा रहे हैं और उत्पादन घटता जा रहा है। इसके अलावा, खराब जल निकासी और गलत सिंचाई से जड़ें सड़ सकती हैं और महू (एफिड्स) जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे फसल पूरी तरह चौपट हो सकती है।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

;;;