सात साल की फातिमा नूर ने रखा पहला रोजा
डिगवाडीह मांझी बस्ती की फातिमा नूर, जो सात साल की हैं, ने अपना पहला रोजा रखा। उनके पिता ने बताया कि रोजा रखने से भूख और प्यास का एहसास होता है। फातिमा सुबह से खुश थी, सेहरी के लिए जाग गई और दिनभर हंसी-खुशी से रही। उन्होंने कुरान की तिलावत की और नमाज अदा की।

डिगवाडीह मांझी बस्ती की रहने वाली फातिमा नूर सात साल की हैं। कक्षा एक में पढ़ती हैं। उसने अपना पहला रोजा रखा है। उनके पिता मोहम्मद आफताब आलम ने उसे समझाया कि रोजा रखना अल्लाह ताला की ऐसी इबादत है, जिसमें हम भूख और प्यास की शिद्दत को जानते हैं। इसके जरिए अगर हम कभी भी किसी भूखे प्यासे जरूरतमंद को देखें, तो उसकी तकलीफ का एहसास करते हुए उसकी ओर मदद का हाथ बढ़ाएं। घर वालों ने बताया कि फातिमा शुक्रवार को सुबह से ही काफी खुश थी। सुबह 4:00 बजे खुद नींद से जागकर सेहरी के लिए तैयार हो गई और सारा दिन हंसी-खुशी रही।
घर वाले आज उनके पसंद के अफतारी तैयार की। इस बीच उसने कुरान की तिलावत की और नमाज भी अदा की। नमाज में सबके लिए और खासकर अपने वतन हिंदुस्तान में अमन व चैन की दुआएं मांगी।
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