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पार्टी और परिवार की चुनौती पर संजीव सिंह बोले- जनता आशीर्वाद देगी

पार्टी और परिवार की चुनौती पर संजीव सिंह बोले- जनता आशीर्वाद देगी

संक्षेप:

धनबाद में मेयर पद के लिए संजीव सिंह की उम्मीदवारी चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी द्वारा समर्थित उम्मीदवार की घोषणा के बाद भी, सिंह ने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जनता का आशीर्वाद मिलने की पूरी उम्मीद है और वह विकास के इरादे से मैदान में हैं।

Feb 04, 2026 02:02 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद, विशेष संवाददाता मेयर पद के लिए संजीव सिंह की उम्मीदवारी कोयलांचल के सियासी हलके में चर्चा का विषय है। पार्टी की ओर से समर्थित प्रत्याशी (संजीव अग्रवाल) की घोषणा, इधर परिवार से चाची इंदु देवी (चाचा रामधीर सिंह की पत्नी) की ओर से नामांकन के बाद भी संजीव सिंह का चुनाव लड़ने का निर्णय लिया जाना सामान्य नहीं है। पार्टी और परिवार की चुनौती के बीच उम्मीदवारी पर संजीव सिंह ने कहा कि पूरा विश्वास है कि जनता आशीर्वाद देगी। किसी के लड़ने या नहीं लड़ने के आधार पर निर्णय नहीं लिया है। चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया है तो ले लिया।

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धनबाद के विकास को लेकर जनता के बीच जाएंगे। पूरा भरोसा है सफलता मिलेगी। इधर नामांकन को लेकर सिंह मेंशन में जोर-शोर से तैयारी चल रही है। संकेत दिया गया कि नामांकन में भारी भीड़ जुटेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजीव सिंह ने किसी प्रत्याशी के खिलाफ कोई बात नहीं की। एक सवाल के जवाब में कहा कि कोई कंपनी यदि अपने प्रोडक्ट को बढ़िया बताती है तो इसका मतलब यह नहीं कि उससे बढ़िया प्रोडक्ट नहीं हो सकता। दूसरी कंपनी का प्रोडक्ट आने पर यह धारणा बदल भी जाती है। विकास के इरादे से चुनाव लड़ रहे हैं। कोयलांचल में विभिन्न संगठनों आदि के माध्यम से सक्रिय रहे हैं। जनता से जुड़ाव है, इसलिए मैदान में हैं। अंदरखाने पहले से तैयारी, बस पार्टी के निर्णय का था इंतजार अंदरखाने सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संजीव सिंह मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने की पहले से तैयारी कर रहे थे। वैसे पार्टी की ओर से समर्थित प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार हो रहा था। पार्टी से समर्थन नहीं मिलने के बाद समर्थकों के साथ मेंशन में विचार-विमर्श कर चुनाव में जाने का निर्णय लिया गया। पहले से चुनाव लड़ने के इरादे के कारण ही नामजदगी का पर्चा पहले ही खरीद लिया गया था। भाजपा समर्थित प्रत्याशी के लिए दावेदारी भी की थी। बात नहीं बनी तो अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया।