स्मृति शेष: बशीर बद्र की शायरी व गजलों पर जब झरिया में बजी थीं तालियां

हिन्दुस्तान, धनबाद
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मशहूर शायर बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। धनबाद-झरिया के पुराने लोगों ने उन्हें याद किया। बद्र ने उर्दू गजल को नई पहचान दी और उनकी शायरी में रुमानियत, इंसानियत एवं आदमीयत देखने को मिलती है। कवि अहमद निसार ने कहा कि बद्र की शायरी हमेशा याद रखी जाएगी।

स्मृति शेष: बशीर बद्र की शायरी व गजलों पर जब झरिया में बजी थीं तालियां

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों... कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी, यूं कोई बेवफा नहीं होता... लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में...। इन पंक्तियों को लिखने वाले मशहूर शायर व पद्यश्री पुरस्कार से सम्मानित बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। बशीर बद्र के निधन के बाद उर्दू साहित्य से जुड़ाव रखने वाले धनबाद-झरिया के पुराने लोगों ने उन्हें याद किया। मशहूर शायर बशीर बद्र दो बार धनबाद के झरिया आ चुके हैं। बोर्ड उर्दू मध्य विद्यालय झरिया के वरीय शिक्षक शरीफ रजा कहते हैं कि उन्हें झरिया से लगाव था। जब भी मौका मिला, वे झरिया आए। 1980 के दशक में वे पहली बार उर्दू लाइब्रेरी झरिया के बैनर ते झरिया चिल्ड्रन पार्क में आयोजित मुशायरा सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। उसके बाद 90 के दश में किड्स गार्डन झरिया में आयोजित मुशायरा सम्मेलन में शामिल होकर एक से एक शायरी व गजल सुनाया। उन्होंने कहा कि उस समय महमूद हुसैन लाइब्रेरी के अध्यक्ष, सुल्तान रिजवी सचिव व शौकत अली संयुक्त सचिव हुआ करते थे। मालिकजादा मंजूर अहमद, ज़ुबैर रिजवी, शम्स मीनाई और ताहिर फराज भी बशीर बद्र के साथ आये थे। सभी शायर महमूद हुसैन के घर एमएच हाउस में विश्राम करते थे। शरीफ रजा ने कहा कि इनकी शायरी में रुमानियत, इंसानियत एवं आदमीयत देखने को मिलती है। साहित्य में उनकी कमी खलेगी.

बशीर बद्र ने उर्दू गज़ल को नई पहचान दी

कवि अहमद निसार ने कहा कि बशीर बद्र के निधन की खबर ने साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनकी शायरी ने मोहब्बत, तन्हाई, रिश्तों और इंसानी जज़्बात को जिस खूबसूरती और सादगी से बयान किया, वह हमेशा याद रखी जाएगी। बशीर बद्र साहब ने उर्दू गजल को नई पहचान दी और अपनी नर्म लहजे वाली शायरी से करोड़ों दिलों को छुआ।

पूछे जाने वाले प्रश्न

बशीर बद्र का निधन कब हुआ?
बशीर बद्र का निधन गुरुवार को हुआ।
Amit Watts

लेखक के बारे में

Amit Watts

शॉर्ट बायो: अमित वत्स पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा का कवरेज कर रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव
अमित वत्स पत्रकारिता जगत में जाना पहचाना नाम हैं। पत्रकारिता में 23 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण में एजुकेशन व रोजगार से जुड़े बीट की रिपोर्टिंग करते हैं। एजुकेशन बीट पर मजबूत पकड़ है।


करियर का सफर
अमित ने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण से की। बहुत ही कम समय में प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। प्रारंभिक वर्षों में ही एजुकेशन बीट पर पकड़ बनाई। वर्ष 2009 में हिन्दुस्तान से जुड़े। उसके बाद पिछले 16 वर्षों से हिन्दुस्तान में शिक्षा समेत अन्य बीट का नेतृत्व कर रहे हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए भी लगातार खबरें लिख रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्टभूमि और एजुकेशन रिपोर्टिंग
बीएड, एमए एजुकेशन के साथ ही मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई का लाभ अमित को एजुकेशन बीट की रिपोर्टिंग में मिला। इसकारण एजुकेशन बीट पर कमांड होने के साथ ही आईआईटी धनबाद, यूनिवर्सिटी शोध की खबरें, वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने व एक्सक्लूसिव स्टोरी लिखते हैं।


शिक्षा और रोजगार
शिक्षा को सीधे आर्थिक अवसरों और रोजगार से जोड़ने पर केंद्रित विश्लेषण समेत अन्य एक्सक्लूसिव खबरें लिखी है। शिक्षा से संबंधित खबरों पर अमित की गहरी समझ है। अमित का मानना है कि तथ्य आधारित व विश्वसनीयता पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है। पाठकों को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए। रिपोर्टिंग में विशेषकर छात्र केन्द्रित दृष्टिकोण जरूरी है।


विशेषज्ञता
- नई शिक्षा नीति कैसे बदल रही है
- प्रतियोगिता परीक्षाओं के अपडेट
- छात्रों के लिए तनावमुक्त तैयारी
- बोर्ड परीक्षाओं जैक, सीबीएसई, आईसीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया व रिजल्ट का विश्लेषण
- कौशल विकास आधारित शिक्षा

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