धनबाद डिवीजन ने मई में पकड़े रिकॉर्ड तोड़ बेटिकट यात्री
धनबाद रेल मंडल ने टिकट चेकिंग से 3 करोड़ 22 लाख 30 हजार रुपए की रिकॉर्ड कमाई की है। इससे पहले का रिकॉर्ड 3.15 करोड़ रुपए था। इस साल मई में 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पांच टिकट चेकिंग स्टॉफ ने इस कीर्तिमान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के मामले में धनबाद रेल मंडल ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। डिवीजन ने मई 2026 में टिकट चेकिंग से आज तक की सर्वाधिक तीन करोड़ 22 लाख 30 हजार रुपए की रिकॉर्ड कमाई कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले मई 2024 में धनबाद डिवीजन ने टिकट चेकिंग से सर्वाधिक 3.15 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था। रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन में टिकट चेकिंग स्टॉफ की अलग-अलग टीम ने 47 हजार 560 बेटिकट, बिना उचित टिकट या मानक से अधिक बिना बुक लगेज लेकर चलने वाले यात्रियों को पकड़ा और उनसे जुर्माना वसूला। धनबाद डिवीजन ने पिछले साल, यानी मई 2025 में टिकट चेकिंग से दो करोड़ 11 लाख 79 हजार रुपए की आमदनी प्राप्त की थी। पिछले साल के मुकाबले इस साल टिकट चेकिंग से प्राप्त मई माह के राजस्व में 52 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है, जबकि पुराने रिकार्ड की तुलना में इस साल मई महीने की टिकट चेकिंग की आमदनी में दो फीसदी की वृद्धि हुई है。
नए रिकॉर्ड के ये रहे हीरो
टिकट चेकिंग में कीर्तिमान स्थापित करने में पांच टिकट चेकिंग स्टॉफ का विशेष योगदान रहा, या यूं कहें कि ये पांचों नया रिकार्ड बनाने में हीरो रहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सूची में पहले नंबर पर टीटीआई धनबाद नवीन कुमार रहे। उनके अलावा टीटीआई कोडरमा विपिन बिहारी लाल दूसरे, टीटीआई कोडरमा अविनाश कुमार तीसरे, टीटीआई मुकेश कुमार चौथे और टीटीआई धनबाद आशुतोष कुमार सिन्हा पांचवें नंबर पर रहे। सीनियर डीसीएम मनीष सौरभ ने सभी टिकट चेकिंग स्टॉफ की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई दी।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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