1250 लंबित कांडों में चार्जशीट और अंतिम प्रतिवेदन कोर्ट में जमा
धनबाद जिले में 1250 लंबित मामलों में से मई में चार्जशीट और अंतिम फॉर्म न्यायालय में जमा किए गए। एसएसपी प्रभात कुमार की पहल से पुरानी फाइलों को गति मिली है। अब लंबे समय से लटके मामलों में सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।

धनबाद जिले के अलग-अलग थानों में लंबित 1250 कांडों में मई माह में चार्जशीट या फाइनल फॉर्म न्यायालय में जमा किए गए। यह अपने आप में रिकॉर्ड है। एसएसपी प्रभात कुमार के विशेष पहल से वर्षों से लटकी फाइलों ने गति पकड़ी है। करीब तीन दशक पुराने मामलों की जांच को भी रफ्तार मिली है। वर्ष 1998 और 1999 के कांडों में भी जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी गई है। जिले में ऐसे अनेक आपराधिक मामले लंबे समय से लंबित थे, जिनमें अनुसंधान पूर्ण होने के बावजूद चार्जशीट अथवा अंतिम प्रतिवेदन किसी न किसी कारणवश कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे।
लिहाजा इन मामलों में ट्रायल भी शुरू नहीं हो पा रही थी। एसएसपी ने सभी लंबित मामलों की विशेष समीक्षा कर ऐसे मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया। इसके लिए थाना स्तर पर विशेष टीम का गठन कर कार्रवाई में तेजी लाई गई। अभियोजन शाखा प्रभारी मुकेश चौधरी और एसआई रजनीकांत सहित अन्य पदाधिकारियों की निगरानी में डीएसपी मुख्यालय दो नाजिर अख्तर ने चार्जशीट या फाइनल फॉर्म की प्रक्रिया में तेजी लाई। कुछ मामलों में दस्तावेजों के सत्यापन, केस डायरी के संकलन, अभिलेखों की कमी तथा अन्य औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही थी। विशेष टीम ने इन सभी कमियों को दूर कर तेजी से कार्रवाई शुरू की।एसएसपी ने बताया कि पुराने मामलों में चार्जशीट और अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में जमा होने के बाद अब इन मामलों में सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, लंबित मामलों का निष्पादन होगा। दोषियों के विरुद्ध सजा सुनिश्चित करने और पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रगति है। समय पर चार्जशीट दाखिल होना न्याय दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है और पुलिस इस पर लगातार कार्य कर रही है।
लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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