दही-चूड़ा भोज के बहाने निगम चुनाव की जमीन तैयार कर रहे प्रत्याशी

Jan 15, 2026 02:13 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद में नगर निकाय चुनावों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मकर संक्रांति का त्योहार अब सियासी रंग में रंग गया है। प्रत्याशी दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर मतदाताओं तक पहुंच बना रहे हैं। इस आयोजन का मकसद चुनावी समीकरणों को परखना और समर्थन जुटाना है। बाजार में भी दही, चूड़ा और अन्य सामग्री की बिक्री में वृद्धि देखी गई है।

दही-चूड़ा भोज के बहाने निगम चुनाव की जमीन तैयार कर रहे प्रत्याशी

धनबाद, अमित रंजन। नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजने की आहट के बीच प्रत्याशियों ने अपने-अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है। मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रह गया है, अब यह सियासी रंग में रंगता नजर आ रहा है। दही-चूड़ा और तिलकुट के बहाने प्रत्याशी अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। मेयर पद के दावेदारों से लेकर वार्ड पार्षद बनने की तैयारी कर रहे नेता अघोषित रूप से मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं। शहर में बुधवार को छोटे-बड़े स्तर पर दर्जनों दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया।

यह सिलसिला गुरुवार और शुक्रवार को भी चलेगा। इन आयोजनों में आमंत्रित मेहमानों में समाज और मुहल्लों के प्रभावशाली लोग, स्थानीय नेता, व्यवसायी व सामाजिक कार्यकर्ता आदि शामिल हो रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आयोजन सिर्फ परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों को परखने और समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा है। मेयर पद के कई दावेदार अपने-अपने समर्थकों के साथ बड़े पैमाने पर आयोजन कर रहे हैं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि उनकी पकड़ शहर में मजबूत है। वहीं वार्ड स्तर पर संभावित पार्षद प्रत्याशी मोहल्लों और समाज के आधार पर भोज कर मतदाताओं का मूड भांपने में लगे हैं। इन आयोजनों को लेकर सीधे तौर पर चुनाव की बात भले न हो, लेकिन राजनीतिक चर्चाएं और भावी रणनीतियों पर मंथन जरूर हो रहा है। सियासी हलचल का असर बाजार पर भी साफ दिखा है। अन्य वर्षों की तुलना में इस बार दही, चूड़ा, तिलकुट, लाई और गुड़ की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। कुछ दुकानदारों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों ने थोक में सामग्री की खरीदारी की है। पहले ऐसा कम होता था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मकर संक्रांति और नववर्ष के मिलन समारोह जैसे सामाजिक त्योहार चुनावी राजनीति के लिए हमेशा से उपयुक्त अवसर रहे हैं। बिना किसी औपचारिक प्रचार के नेता जनता से सीधे जुड़ जाते हैं और विरोधी उम्मीदवारों की नजर में भी नहीं आते। आचार संहिता लागू होने से पहले इस तरह के आयोजन प्रत्याशियों को मजबूत नेटवर्क बनाने का मौका देता है। ऐसे आयोजन चुनावी माहौल की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर धनबाद में इस बार मकर संक्रांति सिर्फ पर्व नहीं, बल्कि नगर निगम चुनाव की अनौपचारिक शुरुआत बन चुकी है। दही-चूड़ा के स्वाद के साथ सियासी संदेश भी परोसे जा रहे हैं और यह साफ संकेत दे रहा है कि चुनावी रणभूमि धीरे-धीरे सजने लगी है।

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