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आईआईटी आईएसएम धनबाद का शताब्दी सप्ताह समारोह में पीके मिश्रा ने कहा : भारत तेजी से आगे बढ़ रहा

आईआईटी आईएसएम धनबाद का शताब्दी सप्ताह समारोह में पीके मिश्रा ने कहा : भारत तेजी से आगे बढ़ रहा

संक्षेप:

धनबाद/ मुख्य संवाददाताप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने बतौर मुख्य अतिथि आईआईटी आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह समारोह

Wed, 3 Dec 2025 05:34 PMNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद/ मुख्य संवाददाता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने बतौर मुख्य अतिथि आईआईटी आईएसएम धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस, अंतरिक्ष और क्वांटम टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी उपलब्धियां देश की ताकत बन रही हैं। भारत ने 2047 तक विकसित देश बनने का संकल्प लिया है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास का नहीं है। यह प्रकृति, संस्कृति, विज्ञान और तकनीक के संतुलित समन्वय का दृष्टिकोण है। विकसित भारत की इस यात्रा में आईआईटी धनबाद जैसे संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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संस्थान के पेनमेन हॉल में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में पीके मिश्रा ने कहा कि आईआईटी धनबाद को क्रिटिकल मिनरल्स, एआई, हरित ऊर्जा, सतत विकास और समाजहित वाली तकनीकों में रिसर्च को और आगे ले जाना चाहिए। यहां की आधुनिक प्रयोगशालाएं और सिम्युलेशन सुविधा भारत की क्रिटिकल मिनरल रणनीति को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। यह संस्थान अन्वेषण, प्रौद्योगिकी विकास, उन्नत निर्माण व सार्वजनिक हित में अनुसंधान क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

एक सदी से अहमद योगदान दे रहा आईआईटी आईएसएम

संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आईआईटी धनबाद पिछले एक सदी से राष्ट्र निर्माण, खनन प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास में अहम योगदान देता आया है। आने वाले दशकों में भी इसकी भूमिका और बढ़ेगी। महिला-नेतृत्व वाले विकास पर भी जोर दिया और कहा कि संस्थान का इनोवेशन इकोसिस्टम देखकर वे बेहद प्रभावित हैं। पीके मिश्रा ने कहा कि शताब्दी वर्ष केवल एक उपलब्धि नहीं है। यह याद दिलाता है कि जब कोई संस्थान ज्ञान को लोककल्याण के लिए उपयोग करता है, तभी उसका योगदान देश की प्रगति में वास्तविक प्रभाव पैदा करता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को समझें। जिससे हमें यह विश्वास मिलता है कि भारत यह लक्ष्य अवश्य प्राप्त करेगा। भारत के दीर्घकालीन विकास को फ्रंटियर सेक्टर पर निर्भर करना होगा। इसमें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिज, ब्लू इकोनॉमी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल है। आज अंतरिक्ष क्षेत्र खुलने के बाद 300 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। चंद्रयान तीन व आदित्य एलवन इसकी सफलता के प्रतीक हैं।