नेपाल में हिंसा पर धनबाद के नेपालियों ने दी प्रतिक्रिया
नेपाल में कई दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। नेपाली नागरिकों ने चिंता जताई है कि सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाकर युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है। युवाओं की मांग रोजगार और विकास की है।...

धनबाद : भारत के पडोसी देश नेपाल प्रर्दशन की आग में झुलस रहा है, नेपाल में कई दिनों से हिंसक प्रर्दशन हो रहे है और लोगों ने संसद भवन से लेकर पीएम और राष्ट्पति सहित कई घरों को आग के हवाले कर दिया। पूरे देश में अराजकता फैल गई है। जिसको लेकर धनबाद के नेपाली नागरिकों ने गहरी चिंता जताई है। शहर के पॉलटेकनिक रोड स्थित नेपाली परिवार ने खास बातचीत किया। जहां उन्होनें कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाना लोकत्रांतिक है। इससे घोटालों और भष्टाचार को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहां के युवाओं की असली मांग रोजगार, अवसर और विकास की है। असल में युवा सिफ बदलाव और प्रगति की राह तलाश रहे है। पॉलटेकनिक रोड में एक नेपाली परिवार रह रहा सालों से : पॉलटेकनिक रोड के अम्बेंडकर नगर में एक नेपाली परिवार करीब एक सौ साल से रह रहा है। परिवार में कुल 11 सदस्य है। उन्होंनें कहा कि चीन, अमेरिका के कारण ही नेपाल में हिंसा हो रही हैं। परिवार के सभी सदस्य नेपाल के धाण जिले के घोरई के रहने वाले हैं। उन्होंनें यह भी बताया कि सोशल मीडिया बैन नही होना चाहिए था। कोयलांचल के कई नेपाली नागरिक डरे और सहमे हुए है। नेपाल के युवा कर रहे है पीएम मोदी जैसे प्रधानमंत्री की मांग : उन्होनें यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान झडप और हिंसक घटनाओं के कारण इतनी बडी संखया में जाने गई है। वही इस घटना के बाद काफी भारतीय नेपाल में फंसे हुए है। वही उन्होनें यह भी कहा कि इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर बहुत ऐसी वीडियो वायरल हो रही है। जिसमें नेपाली युवाओं के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी जी की तरह नेपाल को अगर प्रधानमंत्री मिल जाए तो नेपाल विकसित देश बन सकता हैं। नेपाल में प्रधानमंत्री मोदी जैसा शक्तिशाली प्रधानमंत्री की जरूरत हैं। रोजगार और विकास पर मांग पर है युवा : नेपाल के युवाओं की मांग रोजगार, अवसर और विकास की है। असल में युवा सिफ बदलाव और प्रगति की राह तलाश रहे है। लेकिन नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया को बैन कर युवाओं की आवाज को दबाने के लिए सोशल मीडिया को बैन किया हैं। नेपाल सरकार घोटालों और भष्टाचार को छुपाने का प्रयास कर रही हैं। राज नेताओं व आवास पर हुआ हमला : नेपाल के पूर्व पीएम झालानाथ खनाल के घर में असामाजिक तत्वों ने आग लगा दी। इसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से जल गई थी। जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उधर पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को उनके घर में घुसकर पीटा, जबकि वितमंत्री विष्णु पोडोल को काठमांडू में उनके घर में पास दौडा-दौडाकर पीटा गया। देश में जारी हिंसक घटनाओें के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया है। नेपाल के इतिहास में राजसत्ता लंबे समय तक हावी रही, लेकिन अब लोग लोकतांत्रिक शासन की ओर बनाना चाह रहे हैं। - खडक सिंह देश के युवा नए विकास और अवसरों की मांग कर रहे है, उनकी आवाज को अनसुना नही किया जा सकता। - मीना देवी असामाजिक तत्व और राजनीतिक के स्वाथी लोग शांतिपूण आंदोलन को हिंसक रूप दे रहे हैं। असल में युवा सिफ बदलाव और प्रगति की राह तलाश रहे हैं। - पुंती देवी युवाओं की आवाज को दबाने के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाना लोकत्रांतिक है। इससे घोटालों को और भष्टाचार को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। - राधा कुमारी भारत का नेपाल के साथ लंबा बॉर्डर है। ऐसे में राजनीतिक संकट की वजह से भारत में नेपाली नागरिकों का माइग्रेशन बढ सकता है। - बिरबहादुर चीन का हस्तक्षेप नेपाल के आंतरिक मामलों में काफी ज्यादा बढ चुका हैं। नेपाली अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस की अहम भूमिका हैं। - नीरज कुमार नेपाल में कई बार सत्ता परिवर्तन की वजह से वहां राजनीतिक अस्थिरता का संकट बढता जा रहा है। - शिबू पोरेल नेपाल में शांतिपूण तरीके से सरकार को वार्ता करनी चाहिए। सरकार को इस युग में सोशल मीडिया बैन नही करनी चाहिए थी। - कुल बहादुर जेन-जी के आंदोलन से नेपाल पुरी तरह हिल गया हैं। यहां पर ऐसी राजनीतिक उथल-पुथल शायद ही पहले देखी गई होगी। यह बहश सोशल मीडिया से शुरू हुई थी, जो देखते ही देखते सडकों पर क्रांति के रूप में तब्दील हो गई। पहले से ही लाखों नेपाली मूल के नागरिक भारत में टेंपरेरी या परमामेंट रोजगार कर रहे है। हिंसक प्रर्दशन और उथल-पुथल के बाद सेना ने पूरे देश का कंट्रोल अपने हाथ में लेकर सख्त पाबंध्ियां और कफ्यू लागू कर दिया है। सेना को राजधानी काठमांडू की सडकों पर उतारा गया है। नेपाल में हिंसा के बाद भारत-नेपाल के तमाम बॉडरों पर अलर्ट जारी कर गया हैं। सीमावर्ती जगहों पर अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया हैं।
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