Maithil new maiden to celebrate today Maithil will introduce new girls from today - मैथिल नवविवाहिता आज से करेंगी मधुश्रावणी DA Image
12 नबम्बर, 2019|3:33|IST

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मैथिल नवविवाहिता आज से करेंगी मधुश्रावणी

मिथिलांचल का लोकपर्व मधुश्रावणी की सोमवार से शुरुआत होगी। 13 दिन तक चलने वाले पर्व को लेकर धनबाद में भी नवविवाहित मैथिल कन्याएं उत्साहित हैं, जिनकी शादी पिछले सावन के बाद हुई है, वे कन्याएं इस वर्ष मधुश्रावणी पूजेंगी।

पति की दीर्घायु और सुख-शांति के लिए मधुश्रावणी का व्रत करने की परंपरा है। सावन के कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन यानी 22 जुलाई से मधुश्रावणी व्रत की शुरुआत हो रही है और सावन के शुल्क पक्ष की तृतीया के दिन तीन अगस्त को समापन होगा। धनबाद में भी नई-नवेली कन्याओं के घरों में तैयारियां जोरों पर हैं। मिट्टी की मूर्तियां, विषहरा, शिव-पार्वती बनाई गई हैं।

मधुश्रावणी जीवन में सिर्फ एक बार शादी के पहले सावन को किया जाता है। नवविवाहिताएं बिना नमक के 13 दिन भोजन ग्रहण करेंगी। व्रतियां गणेश, गौरी, विद्यापति, महादेवी की गीत सुनेंगी। मान्यता के अनुसार पहले दिन यानी पंचमी को महाविषहरा को दूध और धान-लावा चढ़ाकर तक्षक नाग को प्रसन्न किया जाएगा। मधुश्रावणी पर्व आमतौर पर कन्याएं अपने मायके में ही करती हैं, लेकिन अनुष्ठान में ससुराल पक्ष से भार (सौगात) भेजने की परंपरा है। इसमें दूल्हे के घर से पूजा की सामग्री से लेकर कन्या का भोजन तक भेजा जाता है।

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