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नवमी के दिन उमड़ती है हजारों की भीड़, इस वर्ष लगभग एक हजार पाठा की बलि का है अनुमान

नवमी के दिन उमड़ती है हजारों की भीड़, इस वर्ष लगभग एक हजार पाठा की बलि का है अनुमान

संक्षेप:

धनबाद जिले के कतरास स्थित मां लिलौरी मंदिर नवरात्र के दौरान श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन जाता है। महानवमी के दिन हजारों भक्त यहां बलि अर्पित करते हैं। मंदिर की स्थापना 800 साल पहले राजा सुजन सिंह ने की...

Mon, 29 Sep 2025 03:54 AMNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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कतरास, प्रतिनिधि। धनबाद जिले के कतरास स्थित मां लिलौरी मंदिर नवरात्र के दौरान आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। नौ दिनों तक यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेषकर महानवमी के दिन मंदिर में मेले जैसा दृश्य देखने को मिलता है। यहां पाठा बलि देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। प्रतिदिन बलि होती है, लेकिन नवमी को दूर-दराज से हजारों भक्त पहुंचकर मां को शक्ति का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना और बलि अर्पित करते हैं। इस बार बलि की संख्या लगभग एक हजार तक पहुंचने का अनुमान है। भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने प्रशासन से सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की मांग की है।

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यह मंदिर आज झारखंड समेत कई प्रदेशों का सिद्ध पीठ माना जाता है और हर साल यहां बढ़ती भीड़ इसकी ख्याति को और मजबूत करती है। 800 साल पहले राजा सुजन सिंह ने की थी मां की प्रतिमा की स्थापना : मां लिलोरी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मध्यप्रदेश के रीवा के राज घराने के वंशज से ताल्लुक रखने वाले कतरासगढ़ के राजा सुजन सिंह ने कतरास के इस जंगल में 800 वर्ष पहले माता की प्रतिमा स्थापित की। भक्तों का विश्वास : मां लिलौरी की ख्याति सिर्फ जिले तक सीमित नहीं है। झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश तक मां की महिमा की गूंज है। भक्तों का विश्वास है कि मां लिलौरी हर सच्चे मन से मांगी मन्नत पूरी करती हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त पुनः आकर शीश नवाते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। विविध धार्मिक कार्य : मां की पूजा यहां फूल, माला, बताशे, इलायची दाना और नारियल से की जाती है। साथ ही मंदिर परिसर में मुंडन, कर्म संस्कार, विवाह, वाहन पूजा, अनुष्ठान और पाठा बलि जैसे धार्मिक कार्य भी संपन्न होते हैं। आस्था का अद्भुत संगम : नवरात्र के दिनों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ मंदिर परिसर में चारों ओर रौनक रहती है। श्रृंगार सामग्री, प्रसाद और नाश्ते के स्टॉल श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। महानवमी के दिन उमड़ती भीड़ और गूंजते जयकारे मां लिलौरी की महिमा और श्रद्धालुओं की आस्था का जीवंत प्रमाण बन जाते हैं।