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नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग, खाली-खाली दौड़ रही स्पेशल ट्रेन

धनबाद, मुख्य संवाददाता। रेलवे ने आनंद विहार और मुंबई के लिए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। दोनों ट्रेनें आसनसोल से खुलकर वाया धनबाद चल रही हैं।...

नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग, खाली-खाली दौड़ रही स्पेशल ट्रेन
हिन्दुस्तान टीम,धनबादThu, 18 Apr 2024 02:00 AM
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धनबाद, मुख्य संवाददाता। रेलवे ने आनंद विहार और मुंबई के लिए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। दोनों ट्रेनें आसनसोल से खुलकर वाया धनबाद चल रही हैं। बुधवार को चली आसनसोल-मुंबई समर स्पेशल में एसी क्लास की सीटें खाली रह गईं। यही हाल आसनसोल-आनंद विहार समर स्पेशल का भी है। विशेषज्ञों की मानें तो स्पेशल ट्रेनों का स्पेशल किराया यात्रियों को रास नहीं आ रहा है।
मुंबई के लिए चलने वाली नियमित ट्रेनों की अपेक्षा स्पेशल ट्रेन में 175 से 420 रुपए और दिल्ली के लिए सालों भर चलने वाली ट्रेनों की तुलना में स्पेशल ट्रेन में 150 से 400 रुपए तक अधिक भाड़ा वसूला जा रहा है। अधिक किराए की वजह से स्पेशल ट्रेनों में 80 से 95 प्रतिशत सीट खाली हैं। वैवाहिक लग्न का सीजन होने के बावजूद यात्रियों का स्पशेल ट्रेनों के प्रति रूझान उत्साहजनक नहीं है। यह स्थिति तब है जब धनबाद होकर चलने वाली मुंबई की एकमात्र ट्रेन हावड़ा-मुंबई में अगले कई दिनों तक स्लीपर, थर्ड एसी और सेकेंड एसी में नोरूम या लंबी वेटिंग है। दिल्ली के लिए चलने वाली किसी भी नियमित, साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक ट्रेनों में सीट खाली नहीं हैं।

गर्मी छुट्टी के लिए भी नहीं हो रही बुकिंग: रेलवे ने लग्न के साथ-साथ गर्मी की छुट्टियों को ध्यान में रखकर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। 17 अप्रैल से 19 मई तक आसनसोल-मुंबई स्पेशल और 19 अप्रैल से 28 जून तक आसनसोल-आनंद विहार स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। यदि ट्रेन को यात्रियों का साथ मिला और बुकिंग की स्थिति अच्छी रही तो इसके फेरों में विस्तार की भी संभावना है। हालांकि गर्मी की छुट्टियों के लिए भी लोग ट्रेन में एडवांस बुकिंग नहीं करा रहे हैं।

होली स्पेशल ट्रेनों को भी नहीं मिले थे यात्री

पिछले माह होली के मद्देनजर रेलवे ने एक साथ रांची और टाटानगर स्टेशन से बिहार के अलग-अलग स्टेशनों के लिए सात स्पेशल ट्रेनें चलाई थीं। ये सभी ट्रेनें धनबाद होकर चलाई गई थीं लेकिन किसी भी ट्रेन को अपेक्षाकृत यात्री नहीं मिल सके। खाली-खाली दौड़ने के कारण स्पेशल ट्रेनों के कई फेरों को रद्द करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि ढंग से प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण भी स्पेशल ट्रेनें खाली रह जाती हैं।

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