
मिलन समारोह में जीवंत हुई आदिवासी परंपरा
धनबाद में केंद्रीय सरना समिति द्वारा चिरागोड़ा स्थित झारखंड मैदान में सोहराय-सकरात मिलन समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह 7 जनवरी से 14 जनवरी तक चला, जिसमें आदिवासी परंपराएं जीवंत हुईं। कार्यक्रम में तीरंदाजी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें अमित मुर्मू ने पहला स्थान प्राप्त किया।
धनबाद, वरीय संवाददाता। केंद्रीय सरना समिति ने चिरागोड़ा स्थित झारखंड मैदान में सोहराय-सकरात मिलन समारोह का आयोजन किया। यह सात जनवरी को सोहराय (गोट पूजा) से शुरू होकर 14 जनवरी को सकरात पर समाप्त हुआ। सोहराय से सकरात तक के सफर में आदिवासियों की विविध परंपराएं जीवंत हुईं। अंतिम दिन नदी में स्नान के बाद सभी शिकार पर गए। शाम में लौटने व शिकार के बंटवारे के बाद संध्या में लोग चिरागोड़ा स्थित झारखंड मैदान में जुटे, जहां सोहराय-सकरात का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत (भेजा तुयं) पारंपरिक तीरंदाजी के साथ की गई। भोदरोंग (कप्तान) के नेतृत्व में कुंवारे लड़के एराडोम (रेहड़ी) के पेड़ काट कर लाते हैं और पारंपरिक रूप से भोदरोंग के घर के गुड़ पीठा ( चावल और गुड़ से बनीं पकवान ) को एराडोम के पेड़ की चोटी पर किसी मजबूत डंठल पर पिरोकर गाड़ा गया।
फिर भोदरोंग के नेतृत्व में ही मंच पर स्थापित सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद तीरंदाजी के साथ विभिन्न प्रकार के खेलों की शुरुआत हुई। इस वर्ष तीरंदाजी प्रतियोगिता में अमित मुर्मू प्रथम स्थान पर रहे, जबकि द्वितीय राजकिशोर हांसदा, तृतीय रवि लाल बास्की और चतुर्थ स्थान पर दिनू बास्की रहे। सभी को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में गांव के मुखिया (मांझी हाड़ाम) सत्यनारायण मुर्मू, भोदरोंग बुधन बास्की, हेमलाल बास्की, संरक्षक विरेन्द्र हांसदा, हांगो उरांव, लखीराम मुर्मू, विकास मुर्मू, रवि लाल बास्की, राजकिशोर हांसदा, रोशन टुडू, अमित मुर्मू, अजय सोरेन, विनय टुडू, राजू हांसदा, अक्षय मुर्मू, राहुल बास्की व चंदन बास्की का योगदान रहा।

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