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वितरागी होते हैं जैन तिर्थकर : विनिश्चय सागर जी

धनबाद, वरीय संवाददाता । जैन मत के अनुसार हमारे तीर्थंकर वितरागी होते है ,न वो किसी से कुछ लेते है न किसी को कुछ देते...

वितरागी होते हैं जैन तिर्थकर : विनिश्चय सागर जी
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हिन्दुस्तान टीम,धनबादSun, 16 Jun 2024 04:45 PM
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धनबाद, वरीय संवाददाता । जैन मत के अनुसार हमारे तीर्थंकर वितरागी होते है ,न वो किसी से कुछ लेते है न किसी को कुछ देते है । उनके बताए धर्म के रास्ते पर चलकर मनुष्य अपने लक्ष्य परम सुख तक पहुंच सकता है। यह बातें आचार्य 108 श्री विराग सागर जी के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी ने कही। वह रविवार की को धैया मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। इससे पूर्व रविवार प्रात: मुनिराज संसंघ का धैया जैन मंदिर में आगमन हुआ । उनके साथ छह अन्य मुनिराज और एक छुलक भी थे। प्रातः सात बजे धैया जैन मंदिर में ही उनका प्रवचन हुआ। मुनियों ने आहार चर्या की। जबकी संध्या में पुन: विनिश्चय सागर जी अपने प्रवचनों से उपस्थित जैन समाज का पथ प्रदर्शित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जैन समाज के संजय गोधा, मनीष शाह, सुशील बाकलीवाल, मनीष झांझरी, अमित जैन, राखी जैन ,रेणु जैन, शिल्पा जैन, बुलबुल जैन , भारती जैन,सुरेंद्र जैन, नवीन गोधा का सराहनिय योगदान रहा।

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