धनबाद-गोमो होकर चलने वाली 11 ट्रेनों को हाईस्पीड का तमगा
रेलवे बोर्ड ने धनबाद और गोमो होकर चलने वाली 11 जोड़ी ट्रेनों को हाईस्पीड ट्रेन का दर्जा दिया है। एनएफआईआर की मांग पर 155 ट्रेनों की सूची जारी की गई है, जिसमें सियालदह-बीकानेर, हावड़ा-नई दिल्ली, और गोमो होकर चलने वाली ट्रेनों को शामिल किया गया है। इन ट्रेनों के क्रू स्टॉफ को ट्रिप अलाउंस मिलेगा।

रेलवे बोर्ड ने धनबाद और गोमो होकर चलने वाली 11 जोड़ी ट्रेनों को हाईस्पीड ट्रेन का दर्जा दिया है। अब हाईस्पीड ट्रेन चलाने वालों को रेलवे ट्रिप अलाउंस देगा। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे (एनएफआईआर) ने रेलवे बोर्ड के पीएनएम में यह मुद्दा उठाया था। एनएफआईआर के जोनल सहायक महासचिव पीएस चतुर्वेदी ने बताया कि एनएफआईआर की मांग पर ही बोर्ड ने हाईस्पीड ट्रेनों की सूची जारी की है। हाईस्पीड ट्रेनों की सूची में देश की 155 ट्रेनों को शामिल किया गया है। इस सूची में दोनों ओर से चलने वाली सियालदह-बीकानेर दूरंतो एक्सप्रेस, हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, भुवनेश्वर-नई दिल्ली दूरंतो एक्सप्रेस, गोमो होकर चलने वाली तीनों जोड़ी भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी, सियालदह-आनंद विहार बंगाल संपर्कक्रांति एक्सप्रेस, सियालदह-अमृतसर जालियावालाबाग एक्सप्रेस, अप पूर्वा एक्सप्रेस और हावड़ा-गया वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं।
इन ट्रेनों में ड्यूटी करने वाले क्रू स्टॉफ को ‘ट्रिप अलाउंस’ का लाभ दिया जाएगा।
लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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