
देश को ऊर्जा सुरक्षा में नई तकनीक की जरूरत: प्रो हर्ष गुप्ता
भारत को ऊर्जा सुरक्षा, मिनरल खोज और जियो साइंस रिसर्च में नई तकनीकी प्रगति की जरूरत है। प्रो हर्ष कुमार गुप्ता ने आईआईटी आईएसएम में आयोजित कार्यक्रम में इस पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक जियो-एनर्जी समाधान और उन्नत सिस्मिक तकनीक से भारत की ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।
धनबाद, प्रम़ुख संवाददाता। भारत को ऊर्जा सुरक्षा, मिनरल खोज और जियो साइंस रिसर्च के क्षेत्र में नई तकनीकी प्रगति की तत्काल जरूरत है। उक्त बातें प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक सह आईएसएम एलुमनस प्रो हर्ष कुमार गुप्ता ने कहीं। प्रो हर्ष आईआईटी आईएसएम में शुक्रवार को आयोजित शताब्दी फाउंडेशन वीक के दूसरे दिन डीएसटी–पेयर इवेंट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत को आधुनिक जियो-एनर्जी समाधान, उन्नत सिस्मिक तकनीक और डेटा-ड्रिवन एक्सप्लोरेशन से अपनी रणनीति मजबूत करनी होगी, ताकि मिनरल सुरक्षा और ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके। नई तकनीकें मिनरल खोज, संसाधन मूल्यांकन और ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी।
पेनमेन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि और छात्र शामिल थे। सभी ने क्रिटिकल मिनरल्स, जियो-एनर्जी और जियोसाइंसेज से जुड़ी उभरती तकनीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्थान की 100 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पर आधारित विशेष वीडियो के साथ हुई। इसके बाद अप्लाइड जियोलॉजी, अप्लाइड जियोफिजिक्स, माइनिंग इंजीनियरिंग और एफएमएमई विभागों के विशेषज्ञों ने स्मार्ट माइनिंग, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, नए एक्सप्लोरेशन मॉडल और संसाधन प्रबंधन पर आधारित अपने शोध पेश किए। स्वागत संबोधन प्रो भंवर सिंह चौधरी, विभागाध्यक्ष (माइनिंग इंजीनियरिंग) ने दिया। आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। कला और विज्ञान विभागों द्वारा डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाना भविष्य की रिसर्च का आधार बनेगा। उन्होंने टेक्समी पहल की सराहना की, जिसकी मदद से शोध कार्य उच्च टीआरएल स्तर तक तेजी से पहुंच रहे हैं। अब समय है जब मूलभूत शोध को बाजार में उपयोगी टेक्नोलॉजी में बदला जाए। आईओसीएल बिहार प्रमुख संजीव कुमार चौधरी ने कहा कि दुनिया तेजी से टिकाऊ ऊर्जा मॉडल की ओर बढ़ रही है। भारत को ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समानता का संतुलन बनाना होगा। उन्होंने हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, सोलराइजेशन और ईवी के क्षेत्र में आईओसीएल की पहल साझा कीं और आईआईटी के साथ चल रहे सोलर हाइड्रोजन आधारित क्लीन-कुकिंग प्रोजेक्ट की सराहना की। ईसीएल के निदेशक (टेक्निकल–ऑपरेशंस) नीलाद्रि रॉय ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी की ओर दुनिया के तेजी से बढ़ने से कोयला उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है। आने वाले समय में बैट्री और ऊर्जा स्टोरेज तकनीकें मुख्य भूमिका निभाएंगी और इसके लिए क्रिटिकल मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। दिनभर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञों ने डीप-अर्थ इमेजिंग, सिस्मिक सुरक्षा, स्मार्ट माइनिंग, मिनरल सुरक्षा नीति और पर्यावरणीय संतुलन पर विचार रखे। स्कूल छात्रों ने जियोफिजिकल फील्ड चैलेंज, डिजास्टर-मैनेजमेंट डेमो और क्विज में उत्साह से हिस्सा लिया। वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन डे से जुड़ी गतिविधियों ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता का संदेश दिया। शाम में एवीएवाई ड्रामटीक्स, एलआईटीएम और डब्ल्यूटीसी की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने शैक्षणिक माहौल को रंगारंग बना दिया। वक्ताओं ने कहा कि 100 वर्षों बाद भी आईआईटी (आईएसएम) देश के जियोसाइंस, मिनरल स्ट्रैटेजी और ऊर्जा शोध का नेतृत्व कर रहा है और आने वाले वर्षों में भारत के मिनरल भविष्य, सिस्मिक सुरक्षा और टिकाऊ विकास में इसकी भूमिका और मजबूत होगी। उद्योग और अकादमिक जगत की साझेदारी मजबूत: आईआईईएसटी शिबपुर के निदेशक प्रो वीएमएसआर मूर्ति ने कहा कि आईआईटी आईएसएम देश के खनन और भूविज्ञान शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। भविष्य में एआई-एमएल आधारित डेटा विश्लेषण, रिमोट सेंसिंग और एडवांस्ड रीसाइक्लिंग तकनीकें संसाधन प्रबंधन की दिशा बदल देंगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




