Hindi NewsJharkhand NewsDhanbad NewsIncome Tax Department Uncovers Irregularities at Dhanbad Registration Office
तीन साल में 35 करोड़ से अधिक का गलत डाटा फाइल

तीन साल में 35 करोड़ से अधिक का गलत डाटा फाइल

संक्षेप: धनबाद में आयकर विभाग ने निबंधन कार्यालय का सर्वे किया, जिसमें 35 करोड़ रुपये से अधिक के गलत एसएफटी डेटा का खुलासा हुआ। अधिकांश गड़बड़ियां 30 लाख रुपये से अधिक के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी हैं। विभाग ने आंकड़े दुरुस्त करने के लिए 15 दिन का समय दिया है, अन्यथा पेनाल्टी की चेतावनी दी गई है।

Thu, 13 Nov 2025 02:02 AMNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद, विशेष संवाददाता। धनबाद निबंधन कार्यालय में बुधवार को आयकर विभाग ने सर्वे किया। सर्वे में कई स्तरों पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। आयकर के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रथम दृष्टया तीन साल में 35 करोड़ रुपए से अधिक का गलत एसएफटी (स्पेसिफिक फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) डाटा निबंधन कार्यालय की ओर से फाइल किया गया है। ज्यादातर मामले 30 लाख से अधिक मूल्य के निबंधन से जुड़े हैं। कुछ मामलों में पैन नंबर नहीं है तो कुछ में गलत पैन नंबर है। आयकर विभाग की ओर से निबंधन कार्यालय को 15 दिनों के अंदर आंकड़े दुरुस्त करने की चेतावनी दी गई है।

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अन्यथा पेनाल्टी या प्रॉसिक्यूशन भी संभव है। आयकर अधिकारी (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण विभाग) रंजन गर्ग के नेतृत्व में सर्वे किया गया। आयकर सूत्रों ने बताया कि सर्वे में निबंधन के दो स्लैब 10 लाख रुपए से 30 लाख रुपए एवं 30 लाख रुपए से ऊपर के निबंधन का सर्वे किया गया। 30 लाख रुपए से ऊपर के निबंधन में एसएफटी फाइल करने का प्रावधान है। इसे फॉर्म 61 ए में फाइल किया जाता है। 2022 से अब तक यानी तीन साल की जांच की गई। कई स्तर पर गड़बडियां मिली हैं। पूर्व में कई बार नोटिस दिए जाने के बाद भी आंकड़े दुरुस्त नहीं किए जाने पर सर्वे किया गया। बताया गया कि पैन नहीं होने की स्थिति में फॉर्म 60 में डिक्लरेशन लेना है और फॉर्म 61 में ऑनलाइन फाइल करना है। बताया गया कि धनबाद निबंधन कार्यालय ने अबतक यह रजिस्ट्रेशन ही नहीं लिया है। क्या है एसएफटी: एसएफटी वित्तीय लेन-देन विवरण आयकर अधिनियम के तहत एक रिपोर्टिंग प्रणाली है, जो उच्च मूल्य के लेन-देन पर नजर रखने और कर चोरी रोकने में मदद करती है। बैंक, म्यूचुअल फंड और कंपनियों जैसी विशिष्ट संस्थाओं को कुछ लेन-देन का विवरण देना अनिवार्य है। ये विवरण करदाता के वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में दर्शाए जाते हैं, जिससे अधिक पारदर्शिता और सटीक आईटीआर फाइलिंग सुनिश्चित होती है।