आईआईटी की तकनीक से सस्ता होगा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
आईआईटी आईएसएम धनबाद के प्रोफेसरों ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए कम लागत वाला इलेक्ट्रोड मटेरियल विकसित किया है। यह खोज ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घटाने में मदद कर सकती है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग भविष्य में ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है।

धनबाद, मुख्य संवाददाता देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने की दिशा में आईआईटी आईएसएम धनबाद के प्रोफेसरों ने बड़ी सफलता हासिल की है। आईआईटी धनबाद के भौतिकी विभाग के इंस्पायर फैकल्टी डॉ एसके रियाजुद्दीन, रिसर्च स्कॉलर प्रियदर्शनी तमांग और रुमाना सुल्ताना परवीन ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए कम लागत वाला और प्रभावी इलेक्ट्रोड मटेरियल विकसित किया है। यह खोज ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल पत्रिका स्मॉल (विली, 2026) में प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है, बल्कि देश को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने में भी अहम साबित हो सकती है।
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है। इसका उपयोग उर्वरक उद्योग, रिफाइनरी, स्टील और केमिकल उद्योगों में किया जा सकता है। आने वाले समय में यह ईंधन वाहनों, बिजली उत्पादन और भारी उद्योगों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। डॉ रियाजुद्दीन ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है। अभी पानी को बिजली की मदद से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करने की प्रक्रिया में महंगे धातु जैसे प्लेटिनम और रूथेनियम का उपयोग होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। आईआईटी ने कम लागत वाले और आसानी से उपलब्ध तत्वों मोलिब्डेनम, वैनेडियम, सल्फर और कार्बन का उपयोग कर एक नया कैटेलिस्ट तैयार किया है। यह सामग्री पानी को तोड़ने की प्रक्रिया को तेज करती है और कम ऊर्जा में बेहतर परिणाम देती है। टीम ने यह भी दिखाया कि साधारण सिलिकॉन सोलर सेल की मदद से सीधे सूर्य की रोशनी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाया जा सकता है। इससे साफ और सस्ते ऊर्जा उत्पादन का रास्ता और मजबूत होता है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य आज पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और बढ़ते प्रदूषण की दोहरी चुनौती से जूझ रही है। जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोल और गैस जहां ऊर्जा की जरूरत पूरी करते हैं, वहीं ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शुरू किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।

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