होली पर 122 साल बाद चंद्रग्रहण, तीन मार्च को सूर्योदय से पूर्व होलिका दहन
इस बार होलिका दहन और होली की तिथियों में भद्रा और चंद्रग्रहण ने फेरबदल किया है। विभिन्न पंचांगों के अनुसार, होलिका दहन की तिथि में मतभेद हैं। ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, 2 मार्च की रात को होलिका दहन होगा, जबकि मिथिला पंचांग में 3 मार्च की सुबह का निर्णय है। चंद्रग्रहण 3 मार्च को 4:34 बजे लगेगा।

होलिका दहन और होली के बीच इस बार भद्रा व चंद्रगहण ने तिथियों में फेरबदल कर दिए हैं। इसलिए होलिका दहन को लेकर विभिन्न पंचांगों के अलग-अलग मत हैं। करीब 122 साल बाद ऐसा योग बन रहा है, जब होली के आसपास चंद्रग्रहण पड़ रहा है। इससे होलिका दहन की तिथि को लेकर ज्योतिष विद्वानों में अलग-अलग मत बन गए हैं। कुछ विद्वान दो मार्च की रात को भद्रा के पूच्छ भाग में तो वहीं कुछ मत भद्रा समाप्त होने के बाद तीन मार्च को सूर्योदय से ठीक पूर्व होलिका दहन का निर्णय बता रहे हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5:55 बजे प्रारंभ होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी।
3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा। ग्रहण भारत में दृश्य होने के कारण इसका सूतक भी मान्य रहेगा। सूतक सुबह 9:19 बजे से प्रभावी माना जाएगा। क्या है विभिन्न पंचांगों का मत ऋषिकेश पंचांग (बनारस) : ऋषिकेश पंचांग के अनुसार दो मार्च की देर रात (तीन की सुबह) सूर्योदय से पूर्व 4.56 बजे होलिका दहन का निर्णय दिया गया है क्योंकि भद्रा दो मार्च की शाम को 5.18 बजे से सुबह 4.56 बजे तक रहेगा। मिथिला पंचांग : बनारस और मिथिला पंचाग में 14 मीनट का अंतर बताया गया है। होलिका दहन का निर्णय तीन मार्च की सुबह में 5.10 बजे बताया गया है क्योंकि मिथिला पंचांग के अनुसार भद्रा शाम को 5.16 बजे से तीन की सुबह 5.10 बजे तक रहेगा। महावीर पंचांग : महावीर पंचांग में होलिका दहन दो की रात्रि में 1.53 बजे से देर रात 12.50 बजे तक का निर्णय दिया है। महावीर पंचांग के मतानुसार भद्रा के मुखभाग निकल जाने के बाद होलिका दहन किया जा सकता है। एक घंटा 19 मिनट होगा चंद्रगहण ऋषिकेश पंचांग के अनुसार तीन की शाम को 4.34 बजे चंद्रग्रहण लगेगा। जबकि मोक्ष 5.33 बजे होगा। इस खग्रास चंद्र ग्रहण की कुल मूल अवधि एक घंटा 19 मिनट होगा। नौ घंटा पूर्व सूतक लग जाएगा। वहीं महावहर पंचाग में बताया गया है कि तीन की संध्या 6.00 बजे चंद्रग्रहण दृश्यमान होगा जबकि खंडग्रास चंद्रगहण का मोक्ष 6.48 बजे होगा। सूतक लगते ही मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। मोक्ष के बाद मंदिरों की साफ-सफाई होगी। भगवान के वस्त्र बदले जाएंगे। चार मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।
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