माइनिंग वेस्ट को अवसर में बदलने की बड़ी संभावना : संजीव
धनबाद में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के सीएमडी संजीव कुमार सिंह ने कहा कि कॉपर भारत के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का आधार है। उन्होंने वेस्ट प्रबंधन और सतत नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा की। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल अपनाने की आवश्यकता बताई।

धनबाद, प्रमुख संवाददाता। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के सीएमडी संजीव कुमार सिंह ने कहा कि कॉपर भारत के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का आधार है। यह 100 प्रतिशत रीसाइकिल हो सकता है। उन्होंने हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड की पहल टेलिंग्स मैनेजमेंट, इंडस्ट्रियल वेस्ट प्रोसेसिंग और उद्योग शिक्षा सहयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि माइनिंग वेस्ट को अवसर में बदलने की बड़ी संभावना है। सत्र की अध्यक्षता आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने की। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डीएस मिश्रा व डबलिन सिटी यूनिवर्सिटी (आयरलैंड) के प्रो विजय के गुप्ता सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल थे।
सिंह शुक्रवार को आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह के तीसरे दिन शुक्रवार को सेकेंड नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स इन वेस्ट मैनेजमेंट : चैलेंजेज एंड अपॉर्च्युनिटीज (टीएडब्ल्यूएमसीओ-2025) को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान पूरे दिन पर्यावरण संरक्षण और सतत नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा हुई। इसपर देश-विदेश से शामिल विशेषज्ञों ने अपने शोध और विचार साझा करते हुए वेस्ट मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी के नए आयाम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो विपिन कुमार के स्वागत संबोधन से हुई। प्रो आलोक सिन्हा ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर चर्चा की। सम्मानित अतिथि डीएस मिश्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर वेस्ट मैनेजमेंट पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है। भारत में भी स्वच्छ भारत मिशन के बाद बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने रिड्यूस- रियूज और रीसाइकिल की अवधारणा लागू करने और वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल अपनाने की जरूरत बताई। प्रो विजय के गुप्ता ने कचरा को समस्या नहीं, संभावनाओं की संपत्ति बताया। कहा कि इससे ऊर्जा, बायो-फ्यूल, बायो-मटेरियल और महत्वपूर्ण उत्पाद बनाए जा सकते हैं। उन्होंने एआई आधारित वेस्ट सॉर्टिंग और आधुनिक रिसर्च प्लेटफॉर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को संबोधन करते हुए निदेशक प्रो मिश्रा ने कहा कि संस्थान शताब्दी वर्ष के साथ अपने वयस्क चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां समाज की अपेक्षाएं और भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च, नवाचार, और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने वाले नए विचारों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि टेक्समी और जीसीआरपी जैसी पहलें संस्थान की वैश्विक शोध पहचान को और मजबूत कर रही हैं। कार्यक्रम के दौरान परिसर में दिनभर कई प्लेनरी टॉक्स, डिस्कशन, एआई आधारित डिजिटल ट्विन डैशबोर्ड का लाइव डेमो, बच्चों के लिए गतिविधियां, स्कोलोमिन क्लब के कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयाजित होते रहे। प्रो मनोज कुमार जैन के धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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