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यूपीएससी में संताल-कोयलांचल से चार कामयाब

यूपीएससी परीक्षा में धनबाद से दो, दुमका और बोकारो से एक-एक अभ्यर्थी ने कामयाबी हासिल की है।  बोकारो के रणविजय कॉलेज के प्रोफेसर के पुत्र कुमार गौरव को यूपीएससी में मिला 134वीं रैंक मिली है।
यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में धनबाद के दो छात्रों ने बाजी मारी है। जोड़ाफाटक निवासी प्रभात रंजन पाठक को 137वीं रैंक और कार्मिक नगर निवासी निरंजन कुमार गुप्ता को 728वीं रैंक मिला है। दोनों आईआईटी आइएसएम धनबाद के पूर्ववर्ती छात्र हैं। निरंजन कुमार गुप्ता वर्तमान में बीसीसीएल के धनसार कोलियरी में अधिकारी हैं। प्रभात रंजन पाठक गुरुकुल में शिक्षक थे। वर्तमान में दिल्ली में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
बोकारो के सेक्टर-12 स्थित रणविजय कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर अवध किशोर सिंह के पुत्र  कुमार गौरव ने यूपीएससी की परीक्षा में 134वीं रैंक हासिल की है। तीन भाई-बहनों में मंझले कुमार गौरव ने अपने दूसरे प्रयास में आईएएस की परीक्षा में सफलता पाई है। यह खबर सुनकर देर शाम से ही उनके घर बधाई देनेवालों का तांता घर पर लगा रहा। आईआईटी रुड़की से बीटेक करने के बाद एक्सएलआरआई जमशेदपुर में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर मुंबई की केपीएमजी कंपनी में कार्य करने के दौरान गौरव ने सफलता प्राप्त की। फिलहाल वे कंपनी के टूर पर हैं।
दुमका के गिलानपाड़ा निवासी मोहम्मद अरशद लगातार दूसरी बार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। गत वर्ष जब अरशद ने सफलता पाई थी, तब उनकी रैंक 316 थी। अभी वे असिस्टेंट कमिश्नर इनकम टैक्स पद पर हैं और नागपुर में ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने इस वर्ष दोबारा परीक्षा दी और अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। हालांकि इस बार उनकी रैंक 556 है। मोहम्मद अरशद की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। मोहम्मद अरशद के पिता मोहम्मद अलाउद्दीन दुमका समाहरणालय से क्लर्क पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां तस्मीन खातून गृहिणी हैं। अरशद पांच भाई बहनों में सबसे बड़े हैं। अरशद के पिता मो.अलाउद्दीन ने अपने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि अरशद अपनी धुन का पक्का है। बचपन से ही वह मेधावी और मेहनती रहा है।
असफलता से घबराएं नहीं, प्रयास जारी रखें : कुमार गौरव
बोकारो के कुमार गौरव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बहन को देते हैं। उन्होंने लगातार हौसला बढ़ाते हुए आईएएस बनने की प्रेरणा को बल दिया। गौरव की छोटी बहन बीआईटी मेसरा से बीटेक करने के बाद यूपीएससी की लिखित परीक्षा में इस बार सफल हुई, लेकिन फाइनल में सलेक्शन नहीं हुआ। थोड़ा परेशान रहने के बावजूद उत्साहित होकर अपनी बहन की हौसला अफजाई करते हुए गौरव ने कहा कि सफलता एक बार में न मिलने पर घबरना नहीं चाहिए, बल्कि लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। गौरव ने कहा कि शुरू से ही आईएएस बनकर देश की सेवा में जाने की इच्छा थी, जो अब पूरी हुई है।  शहर के सेक्टर-4जी निवासी कुमार गौरव की बड़ी बहन मुंबई में डॉक्टर है। उनकी प्रेरणा से वे लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होते रहे हैं। कुमार गौरव ने 2005 डीपीएस बोकारो से 12वीं पास की। इसके बाद रुड़की आईआईटी में चयन हुआ।
तैयारी के लिए डेढ़ साल दूर रहा फेसबुक- व्हाट्सएप से : प्रभात रंजन
जोड़ाफाटक निवासी प्रभात रंजन आईआईटी आइएसएम धनबाद के 2015 बैच के छात्र है। आईआईटी धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुटा। परिणाम सामने है। पहले ही प्रयास में 137वीं रैंक मिली। पिता दीनानाथ पाठक इंडियन आर्मी में टीचर और मां वीणा देवी गृहिणी हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद के अनुसार सफलता मिली। सफलता के लिए मैं मई 2015 से सितंबर 2016 तक फेसबुक, व्हाट्सएप व सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूर रहा। अपने एकाउंट को डिएक्टिव कर दिया। 10वीं की पढ़ाई अल्मोड़ा, 12वीं की बोकारो डीपीएस और बीटेक मैकेनिकल आईआईटी आइएसएम से पूरी की। उन्होंने कहा कि बिहार-झारखंड में गरीबी अधिक है। प्लानिंग की कमी ने इंजीनयरिंग से सिविल सर्विसेज की ओर आकर्षित हुआ। बुधवार का दिन मेरे लिए खास बन गया। रिजल्ट की सूचा मिलने पर पिता की आंखों में आंसू आ गए। पिता ने कहा-आज मेरे सपने पूरे हुए। प्रभात रंजन ने कहा कि छात्र-छात्राएं आप्सनल विषय व करेंट अफेयर्स को अच्छे से पढ़ें। ईमानदारी से मेहनत करते हुए अपने आप पर भरोसा रखें। कमी नहीं छोड़ें। साक्षात्कार में आईआईटी आइएसएम में संचालित कर्तव्य के बारे में सवाल पूछा गया। यह पूछा गया कि इस तरह के एनजीओ की जरूरत क्यों पड़ी? प्रभात रंजन सरायढेला में संचालित संस्थान गुरुकुल कोचिंग इंस्टीच्यूट में तीन साल क्लास की। 13 से 14 घंटे तैयारी की। घूमने से परहेज किया।
मेहनत करें, अपना भाग्य खुद लिखें : निरंजन गुप्ता
निरंजन कुमार गुप्ता ने यह सफलता तीसरे प्रयास में प्राप्त की  है। उन्होंने 10वीं की पढ़ाई नवोदय विद्यालय नवादा और 12वीं की साइंस कॉलेज पटना से की। आईआईटी आइएसएम से माइनिंग में बीटेक किया। 2011 में बीसीसीएल में सहायक प्रबंधक के तौर पर योगदान दिया। निरंजन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और पत्नी नूपुर गुप्ता को दिया। निरंजन ने कहा कि काम के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी करना कठिन है, लेकिन मुश्किल नहीं। मुझे घरवालों का पूरा सहयोग मिला। पिछले वर्ष निरंजन का चयन इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में हुआ था। उसे 73वीं रैंक मिली। लेकिन यह इच्छा थी कि सिविल सर्विसेज को क्वालीफाई करना है।  उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास करें। समय बर्बाद नहीं करें। मूल रूप से नवादा पकरीबरमा के निवासी निरंजन कहते हैं कि यह मत सोचें कि मैं गांव के परिवेश से हूं। मुझसे नहीं हो सकेगा। मैं भी गांव के परिवेश से आया। मेरे पिता गांव में खैनी बेचते हैं। मेहतन करेंगे तो आप अपना भाग्य खुद लिख सकेंगे। उन्होंने कहा कि एक साल से सेल्फ स्टडी कर रहा हूं। तैयारी में छात्रों को एक बात याद रखनी चाहिए कि पढ़ाई में बहुत तरह के मोड़ आएंगे। उससे परेशान नहीं हो। अपने लक्ष्य पर केंद्रित करें। तनाव को दूर करने के लिए मेडिटेशन करें। एक महीना पहले ही निरंजन पिता बनें है। पत्नी नूपुर आगर में बिजनेस वुमेन हैं।

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  • Web Title:Four successes in UPSC from Santhal-koylanchal