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लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सादगी से मनी ईद

लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज...

लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज...
1/ 8लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज...
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3/ 8लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज...
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4/ 8लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज...
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Newswrapहिन्दुस्तान टीम,धनबादTue, 26 May 2020 02:58 AM
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लॉकडाउन की बंदिशों के बीच सोमवार को ईद पूरे कोयलांचल में सादगी के साथ मनाई गई। जमात के बजाय लोगों ने घरों में ईद की नमाज पढ़ी। शहर के साथ-साथ पूरे मुल्क को इस मोहलिक बीमारी से निजात दिलाने को दुआ की। मस्जिदों में सहरी के बाद अलसुबह ही नमाज अदा कर दी गई। इसके बाद अपने-अपने घरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोगों ने ईद की नमाज पढ़ी, दुआ की और ऑनलाइन तकरीरे सुनीं।

जहां होता था सामूहिक नमाज, वहां पसरा रहा सन्नाटा

लॉकडाउन का असर यह देखने को मिला कि जहां प्रतिवर्ष सामूहिक नमाज अदा की जाती थी, वहां इस वर्ष सन्नाटा पसरा रहा। स्टेशन रोड स्थित रेलवे ग्राउंड ईदगाह मस्जिद, नया बाजार फुटबॉल ग्राउंड, वासेपुर बाईपास रोड में नमाज पढ़ने के लिए सैकड़ों लोगों का जुटान होता था, लेकिन लॉकडाउन में लोग अपने घरों में ही रहे। कुछ लोग मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर से दुआ मांगते देखे गए।

घरों में अपनों के बीच पढ़ी गई ईद की नमाज

ईद पर लोगों ने लॉक डाउन का पालन करते हुए अपने घरों में अपनों के साथ ईद की नमाज पढ़ी। कोई अपने घर में तो कोई छत पर, कहीं-कहीं आस-पड़ोस के लोग एकजुट होकर भी नमाज पढ़े। नमाज खत्म होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को ईद की बधाइयां दीं। घर के लोग ही एक-दूसरे से गले मिले, जबकि बाहर लोगों ने गले मिलने से परहेज किया।

इत्र की जगह सेनेटाइजर से स्वागत

अमूमन एक-दूसरे के घर ईद जैसे मौकों पर जाने से इत्र से स्वागत किया जाता है। लेकिन कोरोना ने ईद की परंपरा में बदलाव कर दिया है। इस साल इत्र की बजाए लोगों का स्वागत सेनेटाइजर से किया गया। हालांकि कम ही लोग एक-दूसरे के घर ईद की बधाइयां देने और सेवइयां खाने पहुंचे। आस-पड़ोस में रहनेवाले लोग एक दूसरे के घर पहुंचे और ईद की बधाई दी। लेकिन इस दौरान भी एहतियात बरता गया और सोशल डिस्टेंसिंग का बखूबी पालन किया गया। एक दूसरे के घर जाकर मिठी सेवइयों के साथ मुहब्बत बांटी।

लॉकडाउन ने समझाया ज़कात के असल मायने

वासेपुर गुलजारबाग निवासी हाजी जमीर आरिफ कहते हैं की ज़कात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। पवित्र कुरान के मुताबिक ज़कात हमारी कमाई में गरीबों और मिश्कीनों का हक़ है और हर एक सक्षम मुसलमान को साल में अपनी आमदनी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा गरीब, यतीम, लाचार, बेसहारा और मजबूर को दान में देना चाहिए ताकि उस जरूरतमंद की भूख मिट सके और एक दिन वह भी किसी दूसरे को जकात देने के काबिल हो सके। इस साल जिस तरह तमाम बंदिशों में मुसलमानों ने रोजे रखे और ईद के जरिए खुशियों के मुकाम तक पहुंचे। ऐसी विकट परिस्थिति में जकात का महत्व और भी प्रसांगिक हो जाता है। जकात मुसलमान सालों भर दे सकता है। लॉकडाउन में सामर्थ्यवान लोगों ने इसे सार्थक करके दिखाया भी है।

ईद पर कोरोना योद्धाओं को किया गया सम्मानित

धनबाद। ईद पर अम्मी का खाना संस्था और प्यामे इंसानियत फोरम की ओर से कोविड-19 वरियर्स को सम्मानित किया गया। बैंक मोड़ थाना प्रभारी सहित चेक पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों, भूली थाना प्रभारी, पीएमसीएच के चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। संस्था द्वारा इन फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को सेनेटाइजर और मास्क के साथ-साथ सेवइयां भी दी गईं। मौके पर इमारत ए सरिया के मुफ्ती मोहम्मद शाहिद, अब्दुल जब्बार मस्जिद के मौलाना नौशाद, अम्मी की खाना संस्था के को-ऑर्डिनेटर अब्दुल रहमान सहित अन्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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