धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान : गृषा शुक्ला
चिटाहीधाम के श्री रामराज मंदिर में आयोजित श्री रामकथा के तीसरे दिन देवी गृषा शुक्ला ने बताया कि जब धर्म की हानि होती है, तब भगवान अवतार लेते हैं। कलयुग में सबसे बड़ा राक्षस 'मैं' है, जिसे समाप्त करने के लिए भजन करना आवश्यक है। धर्म की रक्षा का कार्य ब्राह्मण करते हैं।

चिटाहीधाम के श्री रामराज मंदिर में आयोजित सात दिवसीय भव्य श्री रामकथा के तीसरे दिन गुरुवार की रात चाकधाम (चित्रकूट) से आई कथा वाचिका देवी गृषा शुक्ला ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और असुर (राक्षस) बढ़ते हैं, तब-तब उसका अंत व धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
धर्म की रक्षा
कलयुग में सबसे बड़ा राक्षस 'मैं' है। मैं मतलब ये राक्षस हमारे खुद के अंदर बसा हुआ है। ये जो हमारे अंदर बसा हुआ राक्षस है, उसका अंत करने के लिए भी हमें भगवान का नाम लेकर उनका भजन करना होगा। प्रभु को हर वो हर जीव प्रिय है जो धर्म की रक्षा करता है। धर्म क्या है, जो शास्त्रों में वर्णित है, वही धर्म है। पुराणों में कहा गया है कि समाज और भगवान के बीच का सेतु का काम एक ब्राह्मण करता है। भगवान धर्म की स्थापना करते हैं तो ब्राह्मण धर्म की रक्षक होते हैं। एक मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक जितने भी उसके संस्कार किये जाते हैं, वे सारे संस्कार एक ब्राह्मण ही करते हैं।
महाआरती का आयोजन
श्रीराम कथा के प्रारंभ में कथास्थल पर महाआरती का आयोजन हुआ। जिसमें बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो, सांसद ढुलू महतो की पत्नी सावित्री देवी के साथ उनका सारा परिवार शामिल हुए।
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