डेढ़ माह में बिलासपुर से 1.1 मिलियन टन पिछड़ गया धनबाद डिवीजन
धनबाद रेल मंडल ने इस साल 31 मार्च को भारतीय रेलवे में विजय पताका लहराई थी। लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-2027 के पहले 50 दिन में धनबाद डिवीजन 1.10 मिलियन टन लोडिंग में पीछे चला गया है। लोडिंग से प्राप्त राजस्व आय में भी धनबाद डिवीजन करीब 160 करोड़ रुपए पीछे है।

धनबाद रेल मंडल ने इस साल 31 मार्च को भारतीय रेलवे ने विजय पताका लहराया था। सर्वाधिक लोडिंग के साथ सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित कर चौथी बार धनबाद डिवीजन इंडियन रेलवे का सिरमौर बना था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-2027 के शुरुआती डेढ़ महीने धनबाद डिवीजन के लिए अच्छा नहीं बीत रहा है। डेढ़ माह में या यूं कहें कि इस वित्तीय वर्ष के पहले 50 दिन में धनबाद डिवीजन बिलासपुर रेल मंडल से लोडिंग में 1.10 मिलियन टन पीछे चला गया।
राजस्व आय में 160 करोड़ पीछे चला गया धनबाद
धनबाद रेल मंडल ने 21 मई तक करीब 26.5 मिलियन टन (एमटी) लोडिंग की, वहीं बिलासपुर मंडल ने इसी अंतराल में 27.6 एमटी लोडिंग कर ली। धनबाद का प्रदर्शन पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में भी 1.7 एमटी पीछे है। पिछले साल अभी तक धनबाद डिवीजन ने 28.2 एमटी लोडिंग कर ली थी। पिछले वित्तीय वर्ष की बात करें तो धनबाद रेल मंडल ने 194.64 मिलियन टन लोडिंग की थी और 23,756.85 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया था।
नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड में लोडिंग में आई कमी
लोडिंग से प्राप्त राजस्व आय में धनबाद डिवीजन करीब 160 करोड़ रुपए पीछे जा चुका है। लोडिंग के साथ-साथ धनबाद बिलासपुर से आमदनी में भी पिछड़ चुका है। धनबाद डिवीजन ने अभी तक 3287 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया है जबकि बिलासपुर रेल मंडल 3447 करोड़ रुपए कमा चुका है। पिछले साल के मुकाबले धनबाद की आमदनी 318 करोड़ रुपए कम है। इस समय तक डिवीजन ने 3605 करोड़ का राजस्व हासिल कर चुका था।
टनल की ऊंचाई बढ़ने का मिलेगा लाभ
नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड (एनसीएल) की लोडिंग में आई गिरावट के कारण धनबाद के लदान का आंकड़ा पीछे जा रहा है। एनसीएल के उत्पादन और लोडिंग में कमी आई है। कोल इंडिया की अन्य कंपनियों में भी लोडिंग पिछले साल के मुकाबले कम दर्ज की जा रही है। इसके अलावा खाली रैक (मालगाड़ी के वैगन) की कमी के कारण भी लोडिंग रफ्तार नहीं पकड़ पा रही। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में धनबाद बिलासपुर को पछाड़ कर फिर से नंबर एक डिवीजन बनेगा। इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
टनल की ऊंचाई बढ़ने का मिलेगा लाभ
गुरपा-गझंडी के 22 किलोमीटर घाट सेक्शन में टनल की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ने से मालगाड़ी के बीओबीआर वैगन अब आसानी से हावड़ा-नई दिल्ली रूट पर चल सकेंगी। साथ ही धनबाद, प्रधानखंता, आसनसोल, झाझा के रास्ते बाढ़, बरौनी और सलाकाटी (नॉर्थ ईस्ट) एनटीपीसी प्लांटों से खाली बीओबीआर रेक धनबाद मंडल लौट सकेंगी। इससे वैगन की उपलब्धता ठीक हो सकेगी.
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लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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