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27 सितम्बर, 2020|4:01|IST

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धनबादवासियों ने गर्मजोशी से किया था प्रणब दा स्वागत

धनबादवासियों ने गर्मजोशी से किया था प्रणब दा स्वागत

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन की खबर जैसे ही धनबादवासियों को मिली। सभी स्तब्ध हो गए। 10 मई 2014 को तत्कालीन इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (अभी आईआईटी आईएसएम) के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि हिस्सा लेने धनबाद आए थे। बरवाअड्डा हवाईअड्डा से बरटांड, रणधीर वर्मा चौक होते हुए आईएसएम पहुंचे थे। आईएसएम तक सड़क के दोनों किनारों में खड़े होकर लोगों ने अभिवादन किया था। प्रणब मुखर्जी ने सभी लोगों को नमस्ते हुए जोहार कहते हुए आगे बढ़े।

65 मिनट रुके थे धनबाद में

आईएसएम के दीक्षांत समारोह में शामिल में प्रणब मुखर्जी में 65 मिनट रुके थे। 3:30 बजे आकर 4:35 बजे रांची के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को मेडल दिया था। समारोह में राष्ट्रपति के साथ, तत्कालीन राज्यपाल डॉ. सैय्यद अहमद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, आईएसएम के तत्कालीन चेयरमैन पीके लाहिड़ी व तत्कालीन निदेशक प्रो. डीसी पाणिग्रही समेत अन्य ने हिस्सा लिया था।

नहीं पढ़ा था स्क्रीप्टेड भाषण : कर्नल एमके

आईएसएम के तत्कालीन रजिस्ट्रार कर्नल एमके सिंह ने कहा कि मुझे अच्छी तरह याद है कि उन्होंने मंच पर सामने मौजूद स्क्रीप्टेड भाषण नहीं पढ़ते हुए अपनी मन की आवाज छात्रों तक पहुंचाई। उन्होंने कहा कि छात्रों व शिक्षकों को यह सोचना होगा कि आखिर विश्व के दो सौ टॉप यूनिवर्सिटी में इंडिया का एक भी क्यों नहीं? क्या हमलोगों ने वह स्टेट्स खो नहीं दिया है? यह दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने अविष्यमरणीय छाप छोड़ी है।

हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ी : डॉ प्रमोद

आईआईटी के डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट के वरीय शिक्षक डॉ प्रमोद पाठक कहते हैं कि यह देश के लिए अपूरणीय क्षति है। जहां भी गए अपनी अमिट छाप छोड़ी। 11 जुलाई 2014 को राष्ट्रपति भवन में पंडित मदनमोहन मालवीय जी पर मेरी संकलित पुस्तक का विमोचन किया। व्यक्तिगत रूप से यह मेरे लिए क्षति है। मृदुभाषी और सरल चरित्र के धनी प्रणव दा आदर्शवादी राजनीतिज्ञों की श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते थे। अब यह कम ही दिखाई पड़ती है।

आईआईटी छात्रों से कहा- शिक्षा व शोध से ही विकास

पूर्व राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह में आईआईटी छात्रों से कहा था शिक्षा, शोध व उद्योग के सहयोग से ही विकास संभव है। नए-नए विषयों पर शोध होने चाहिए। शोध उन विषयों पर हो जिनका लाभ सभी को मिले। झारखंड में खनिज संपदा की भरमार है। खनिज का दोहन भी जरूरी है।

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  • Web Title:Dhanbad people warmly welcomed Pranab da