
1978 की जमीन के कागजात ने ओबीसी प्रत्याशियों का रोका रास्ता
धनबाद नगर निगम के चुनावों में पार्षद के प्रत्याशी 1978 से पहले की जमीन के कागजात की अनिवार्यता के कारण मुश्किल में हैं। झारखंड सरकार के नियमों के अनुसार, जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए 1978 से पहले की जमीन का मालिकाना होना आवश्यक है। इससे कई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
धनबाद, प्रमुख संवाददाता। धनबाद नगर निगम के आरक्षित वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पार्षद के प्रत्याशियों के सामने 1978 से पहले जमीन के कागजात की अनिवार्यता ने उनका रास्ता रोक दिया है। झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए बनने वाले जाति प्रमाण-पत्र में 1978 या उससे पहले की जमीन की डीड होना अनिवार्य है। ऐसे में 1978 के बाद धनबाद में आकर बसे पार्षद के प्रत्याशियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया है। धनबाद नगर निगम में 17 वार्ड ओबीसी आरक्षित हैं, जिसमें प्रत्याशियों की संख्या 200 से अधिक रहने वाली है।
ऐसे में जिनके पास जाति प्रमाण-पत्र बना हुआ है, वे तो चुनाव लड़ पाएंगे। लेकिन जो पहली बार जाति प्रमाण-पत्र बनाकर चुनाव लड़ना चाहेंगे, उनके लिए यह संभव नहीं हो पाएगा। शहर में बिहार और यूपी से आकर बसे लोगों की संख्या अधिक है। नए सिरे से ओबीसी जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए उनके पास 1978 या उससे पहले की जमीन का मालिकाना हक होना जरूरी है। इन प्रत्याशियों का रास्ता सरकार के इस नियम ने रोक दिया है। वहीं एससी-एसटी का जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए खतियान का होना अनिवार्य है। पहले से बने जाति प्रमाण-पत्र को लेकर असमंजस की स्थिति: 2019 के बाद झारखंड में ऑनलाइन जाति प्रमाण-पत्र बन रहा है। इससे पहले 2015 में हुए चुनाव के समय कई पार्षद और उनके खिलाफ लड़ने वाले लोगों ने अपना मैनुअल जाति प्रमाण-पत्र बना लिया था। अब इसी प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। धनबाद में ऐसे कई उम्मीदवार हैं, जो धनबाद में 30 साल से अधिक समय से रह रहे हैं, लेकिन उनके पास जमीन नहीं है, उनके लिए जाति प्रमाण-पत्र बनाना मुश्किल है। 2019 के बाद से जमीन के मालिकाना हक वाला नियम अनिवार्य किया गया है। इस नियम के बाद कई लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पुराना बना जाति प्रमाण-पत्र इस चुनाव में चलेगा कि नहीं, इसका जवाब देने में अधिकारी बच रहे हैं। दो मुखिया के फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से खत्म हो चुका निर्वाचन: धनबाद में दो मुखिया के फर्जी जाति प्रमाण-पत्र की वजह से अभी कुछ दिन पहले उनका निर्वाचन खत्म हो चुका है। एससी रिजर्व वार्ड से बिहार के रहने वाले दो पूर्व मुखिया ने चुनाव लड़कर जीत दर्ज कर ली थी। हारे हुए प्रत्याशी ने इसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग से की थी, जांच के बाद जमुआ पंचायत के मुखिया अर्जुन भूईंया और गोपीनाथडीह के मुखिया बिजेंद्र कुमार पासवान का निर्वाचन खत्म हो गया था। इस घटना के बाद धनबाद में कोई भी अंचलाधिकारी नया जाति प्रमाण-पत्र बनाने से पहले सभी कागजात की गहनता से जांच करने के बाद ही अनुमति दे रहे हैं।

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