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शिशु रोग और एनेस्थीसिया में पीजी की दावेदारी करेगा मेडिकल कॉलेज

शिशु रोग और एनेस्थीसिया में पीजी की दावेदारी करेगा मेडिकल कॉलेज

संक्षेप:

धनबाद मेडिकल कॉलेज ने अगले सत्र से शिशु रोग और एनेस्थीसिया में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों की बढ़ोतरी की योजना बनाई है। कॉलेज ने एनएमसी को आवेदन भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रोफेसर की नियुक्ति के बाद, दोनों विभागों में पीजी कोर्स शुरू होने की संभावना है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।

Nov 26, 2025 02:01 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद, प्रमुख संवाददाता। धनबाद मेडिकल कॉलेज अगले सत्र से पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) की सीटों में बढ़ोतरी की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। कॉलेज प्रबंधन ने शिशु रोग (पेडियाट्रिक्स) और एनेस्थीसिया विभाग में पीजी कोर्स शुरू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को आवेदन भेजा जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि दोनों विभागों में एक-एक प्रोफेसर हो गए हैं, इसलिए आगामी सत्र में ही सीट आवंटन की उम्मीद की जा सकती है। बता दें कि दोनों विभागों में प्रोफेसर के पद रिक्त पड़े थे, इसलिए इस साल शुरू होने वाले सत्र के लिए इन विभागों में पीजी कोर्स के लिए आवेदन भेजना संभव नहीं हो पाया।

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पीजी कोर्स के लिए एनएमसी के मानकों के अनुसार विभाग में कम-से-कम एक प्रोफेसर होना आवश्यक होता है। झारखंड सरकार ने सोमवार को विभागीय प्रमोशन प्रक्रिया पूरी कर अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद अब शिशु रोग और एनेस्थीसिया में एक-एक प्रोफेसर बच गए हैं। इससे अब पीजी के लिए आवेदन किया जा सकेगा। एनएमसी को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद निरीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया होगी। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो आगामी शैक्षणिक सत्र से शिशु रोग और एनेस्थीसिया विभाग में पीजी की पढ़ाई शुरू होने की पूरी संभावना है। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन तैयारी शुरू कर चुका है। अभी पांच विभागों में पीजी: धनबाद मेडिकल कॉलेज के पांच विभागों में फिलहाल पीजी की सीटें हैं। मेडिसिन विभाग में छह सीटें और हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक्स) विभाग में तीन सीटों पर पिछले साल से ही पीजी में दाखिला हो रहा है। इस वर्ष मेडिकल कॉलेज को सर्जरी विभाग को चार सीटें, स्त्री एवं प्रसूति रोग (ओबीजी) विभाग को तीन सीटें और बायोकेमेस्ट्री विभाग को दो सीटें मंजूर हुई हैं, जिससे कॉलेज की कुल पीजी सीटों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज: डॉक्टरों की मानें तो मेडिकल कॉलेज को अधिक पीजी सीटें मिलने से न केवल चिकित्सा शिक्षा मजबूत मिलेगी। बल्कि मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। पीजी के छात्र 24 घंटे अस्पताल में सेवा देते हैं। जैसा कि मेडिसिन और हड्डी रोग विभाग के पीजी छात्र सेवा दे रहे हैं। इससे स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहती है और मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाता है।