आधे-अधूरे इंतजाम से ठंड पीड़ितों को हो रहा इलाज
धनबाद के सरकारी अस्पतालों में ठंड के कारण मरीजों को इलाज में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है, लेकिन अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। दवाओं की किल्लत और विशेषज्ञ इलाज की कमी से मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

धनबाद, अमित रंजन कड़ाके की ठंड के बीच जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ठंड बढ़ते ही सर्दी-खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज मेडिकल कॉलेज अस्पताल और सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां उनके इलाज के लिए जरूरी सुविधाएं अब तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। आधे-अधूरे इंतजाम के कारण मरीजों को इलाज के साथ-साथ कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। झारखंड सरकार ने ठंड के मौसम को देखते हुए अस्पतालों में विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का असर नजर नहीं आ रहा है।
अब तक किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल में चेस्ट क्लीनिक की स्थापना नहीं हो सकी है, जबकि ठंड में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज सबसे अधिक आ रहे हैं। इसका सीधा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें विशेषज्ञ इलाज मिलने में परेशानी हो रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दवाओं की भारी किल्लत है। मरीजों को एंटी एलर्जी दवाएं और स्लाइन तक बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार ओपीडी के मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन औसतन 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से लगभग आधे मरीज इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस यानी बुखार, सर्दी और खांसी से पीड़ित हैं। सांस की समस्या लेकर आने वाले मरीजों की संख्या भी काफी अधिक है। इनमें से रोजाना 10 से 20 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है जबकि 80-90 मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद घर भेज दिया जाता है। भर्ती मरीजों को मेडिसिन वार्ड में रखा जाता है लेकिन यहां भी उन्हें अपनी दवाएं खुद खरीदनी पड़ती हैं। ठंड के मौसम में ईएनटी विभाग में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सर्दी-जुकाम, साइनस की समस्या, एलर्जी, गले में खराश और कान के संक्रमण की शिकायतें आम हो गई हैं। वहीं चर्म रोग विभाग में रूखी त्वचा, खुजली, एक्जिमा, सोरायसिस, फटे होंठ और रूसी से परेशान मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। बच्चों में खांसी-जुकाम और बुखार के मामले बढ़ने के बावजूद अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में बच्चों के लिए खांसी का सिरप तक उपलब्ध नहीं है। इससे अभिभावकों को निजी मेडिकल दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रबंधन बोला- दुरुस्त हो रही व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अस्पतालों में ठंड से जुड़े मरीजों के लिए व्यवस्था की जा रही है। सभी मरीजों को अनिवार्य रूप से कंबल लिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को दो-दो कंबल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। कुछ दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। उसकी आपूर्ति का भी प्रयास चल रहा है। सांस के मरीजों के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। इसकी वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है। ऑक्सीजन बेड भरने की स्थिति में मरीजों को सामान्य बेड पर भी ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में हीटर उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल भी किया जाएगा। ठंड में मरीजों को बेहतर सुविधा देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। हीटर है, जिसका इस्तेमाल आवश्यकतानुसार किया जाएगा। कुछ दवाएं नहीं हैं। उसकी व्यवस्था भी जल्द की जाएगी। -डॉ डीके गिंदोरिया, अधीक्षक, धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल

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