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सरायढेला में मां काली पर भक्तों की अटूट श्रद्घा, 18 प्रतिमाएं स्थापित

सरायढेला गुरुकृपा शोरूम के पास स्थित मां काली मंडप पर भक्तों की अटूट श्रद्धा है। कालीपूजा के दिन रविवार को यहां छोटी-बड़ी कुल 18 प्रतिमांए स्थापित की...

सरायढेला में मां काली पर भक्तों की अटूट श्रद्घा, 18 प्रतिमाएं स्थापित
हिन्दुस्तान टीम,धनबादTue, 14 Nov 2023 03:15 AM
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धनबाद, कार्यालय संवाददाता
सरायढेला गुरुकृपा शोरूम के पास स्थित मां काली मंडप पर भक्तों की अटूट श्रद्धा है। कालीपूजा के दिन रविवार को यहां छोटी-बड़ी कुल 18 प्रतिमांए स्थापित की गईं। धूमधाम व श्रद्धा भाव के साथ परंपराओं का निर्वहन करते हुए मां काली की पूजा हुई। सोमवार को विधिपूर्वक सभी प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया गया। यहां पर मां काली का खुले में वृक्षों से अच्छादित वर्षों पुराना मंडप है।

16 आना की अगुवाई में होती है पूजा

16 आना आर्थात सात गांव। वैसे तो सरायढेला निगम क्षेत्र में आता है लेकिन पौराणिक परंपरा के अनुसार सरायढेला ग्राम पंचायत की परंपराओं को आज भी सात गांव की मान्यता लेकर चलाया जा रहा है। ये गांव हैं कोचाकुल्ही, खरनागढ़ा, नूतनडीह, मंडलपाड़ा, दासपाड़ा, सुगियाडीह, छाताटांड़ सहित सावपाड़ा व पूरे सरायढेला स्टीलगेट क्षेत्र को वर्षों से इसमें शमिल किया गया है। कमेटी के सदस्य बताते हैं कि पहले तो सार्वजिक रूप से 16 आना द्वारा एक प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद जिसकी मान्यता होती है या फिर जिसकी मन्नत पूरी हो जाती है, वे लोग यहां प्रतिमा स्थापित करते हैं। कई लोग बलि देते हैं।

भोक्ता पूजा में भी होती है माता की आराधना

भोक्ता पूजा में नारता पूजा अर्थात पारणा के दिन श्रद्धालु यहां पूजा करने आते हैं। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। महादेव की पूजा के बाद मां के इस स्वरूप का भी आशीर्वाद लेने भक्त पहुंचते हैं क्योंकि यहां मां काली का आशीर्वाद लिए बिना पूजा को सफल नहीं माना जाता।

वर्षों पुराना है मंदिर, मां को छत का बंधन स्वीकार्य नहीं

कमेटी के सदस्य बताते हैं कि यहां मां का मंडप वर्षों पुराना है। हमारी कई पीढ़ी गुजर गई। पुरखों के दिए पंरपराओं का आज भी वैसे ही निर्वहन हो रहा है। बताया कि कई बार छत बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन मां को छत का बंधन स्वीकार्य नहीं है। मंडप के पास बहुत पुराना महुआ का पेड़ है, वहीं पर पीपल व बर के वृक्ष उग आए हैं, जो मां के मंडप को अच्छादित करते हैं।

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