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चाहकर भी डीआरएम मुख्य सचिव के समक्ष नहीं रख पाए बात

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की मौजूदगी में झरिया पुनर्वास एवं धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाईन पर मंगलवार को हुई बैठक में डीआरएम चाहकर भी अपनी बात नहीं रख सके। बैठक में मौजूद आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि डीआरएम रेल लाईन पर कुछ बोलने ही वाले थे कि मुख्य सचिव ने कहा कि इसमें अब देखना क्या है। डायवर्सन करना है तो करना है। कैसे करना है इसपर मिलकर प्लान बनाइए। इसके बाद डीआरएम आगे कुछ और नहीं बोले। मालूम हो धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाईन पर रेलवे की ओर से पहले भी सवाल उठाया गया था और बीसीसीएल एवं डीजीएमएस के खिलाफ टिप्पणी की गई थी। पीएमओ में बैठक के बाद अब वैकल्पिक व्यवस्था पर बात हो रही है। पीएमओ का निर्देश है कि रेल लाईन को बंद करने के पहले संभावित नुकसान का आकलन करें और वैकल्पिक व्यवस्था करें। इधर पांच जून तक पीएमओ को भेजी जाने वाली रिपोर्ट को लेकर डीजीएमएस में काम चल रहा है। डीजी एवं डीडीजी ने रिपोर्ट भेजने के लिए धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाईन का निरीक्षण भी किया। बताया गया कि पूर्व में जो रिपोर्ट भेजी गई थी वहीं स्थिति कायम है। इसलिए रिपोर्ट में कोई बदलाव नहीं है। पुरानी रिपोर्ट ही जाएगी। कुछ और तथ्य मांगे गए हैं जिन्हें शामिल किया जाएगा। रेल ट्रैक को खतरा है और इसमें कहीं कोई शक की गुंजाइश नहीं है। ......... अगले सत्र तक शिफ्ट हो पाएगा आरएसपी कॉलेज? मुख्य सचिव ने अगले सत्र तक आरएसपी कॉलेज को जामाडोबा शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। हालांकि इसमें कई कील कांटे हैं। जेआरडीए के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रशासन को जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया था वह हो गया है। जामाडोबा में 10 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी गई है। इसके अलावा जेआरडीए को कोई मार्गदर्शन नहीं है। कैसे कॉलेज के नए भवन का निर्माण, फंउ आदि को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सचिव के स्तर पर मामले में निर्णय लिया जाना है। आदेश आने तक कुछ नहीं कहा जा सकता।

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  • Web Title:DARM can not be kept in front of Chief Secretary