दो लैपटॉप में छिपा है करोड़ों की ठगी का राज
साइबर ठगी में पकड़े गए गिरिडीह के बबलू और पिंटू कुमार के उपकरणों में करोड़ों की ठगी का राज छिपा है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है। बबलू ने बताया कि कैसे एपीके फाइलों के माध्यम से यूपीआई खातों को खाली किया गया। ठगी में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

साइबर ठगी में पकड़े गए गिरिडीह अहिल्यापुर पंचनटांड़ के बबलू कुमार और पिंटू कुमार के दो लैपटॉप और दो मोबाइल में करोड़ों की ठगी का राज छिपा है। धनबाद साइबर थाना की पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एक्सपर्ट लैपटॉप से मिले सबूतों की मदद से करोड़ों की ठगी का पूरा सच समझने में जुटे हैं। पूरा खेल एपीके फाइल भेज कर मोबाइल का संचालन (एक्सेस) लेने और इसके बाद एकाउंट खाली करने से जुड़ा है। साइबर पुलिस ने बाबूडीह स्थित पिंटू के किराए के मकान से लैपटॉप और मोबाइल जब्त किए हैं। इसकी फोरेंसिंक जांच कराने की भी तैयारी है। बबलू और पिंटू के लैपटॉप पर इनकी ओर से भेजे गए एपीके फाइलों के कंट्रोल पैनल/मास्टर पैनल/एडमिन पैनल मौजूद हैं। लिहाजा इससे टीम यह जानने के प्रयास में है कि इस गिरोह ने कितने एपीके फाइलों की कोडिंग तैयार की। इन्होंने जितनी एपीके फाइल को दूसरों का व्हाट्सएप हैक कर उन नंबरों की सहायता से वायरल किया, उन वायरल एपीके फाइलों को कितने लोगों ने डाउनलोड किया। डाउनलोड करने वाले कितने लोग ठगी का शिकार बने और कितने रुपए गंवाए। पूरी मनी ट्रेलिंग समझी जा रही है।
जांच की प्रक्रिया
विस्तृत जांच में अभी समय लग सकता है। मामले की गंभीरता को देखते केंद्रीय एजेंसियां इस पर नजर बनाए हुए है। इसके विस्तृत जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं। बबलू के गिरिडीह अहिल्यापुर निवासी दो चचेरे भाई अभिषेक मंडल और अजय मंडल के अलावा गिरोह से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े सभी आरोपियों की तलाश चल रही है। बबलू और पिंटू की गर्लफ्रेंड की भी भूमिका जांची जा रही है। दोनों के पूरे परिवार के मोबाइल नंबर और बैंक खातों का स्कैन किया जा रहा है।
यूपीआई खातों का पिन बदल करते से इस्तेमाल
बबलू ने पुलिस को बताया कि एडमिन पैनल/मास्टर पैनल के जरिए एपीके फाइल डाउनलोड करने वालों का नया यूपीआई एकाउंट बना लेते थे, या उनके यूपीआई खातों का पिन बदल कर ये लोग पांच-पांच हजार रुपए के किस्त में उन यूपीआई से लिंक बैंक खातों को खाली कर देते थे। इसके लिए एसआरसी मॉड्यूल नामक एक टूल उन्होंने अपने लैपटॉप में इंस्टॉल किया था। इस सॉफ्टवेयर की मदद से ये लोग यूपीआई वेरिफिकेशन में खाताधारक का मैसेज भेजने के काम को होल्ड कर देते थे। ये लोग ठगी के शिकार लोगों के मोबाइल नंबर से यूपीआई खातों में लॉगिन करते थे तो उनके अकाउंट में पिन बदलने के लिए किसी प्रकार का आधार बाइपास या डेबिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती थी। इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड बदल कर भी खातों से रुपयों की निकासी होती थी।
एपीके फाइल देने वाले अमन का भी सत्यापन कर रही पुलिस
पुलिस और केंद्रीय एजेंसी बबलू कुमार को एपीके फाइल देने वाले अमन उर्फ अमन मेहरा के सत्यापन में जुटी है। अमन का परिचय बबलू से पबजी गेमिंग एप पर हुआ था। अमन टेलीग्राम पर बबलू को एपीके फाइल भेजता था। फाइल के कोडिंग में बदलाव कर बबलू और पिंटू इसे बैंकों व आरटीओ के नाम से नया एपीके फाइल बना कर लोगों के मोबाइलों को हैक कर उनके व्हाट्स एप नंबरों से दूसरों को भेजते थे। पुलिस जांच से बचने के लिए ठगी से प्राप्त राशि को म्यूल एकाउंट के जरिए बिना खाता के योनो कैश के जरिए बबलू और पिंटू लेते थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि टेलीग्राम पर फ्राड के पैसों को घुमाने के लिए आसानी से म्यूल एकाउंट मिल जाते हैं। 30 प्रतिशत काट कर पूरी राशि बिना बैंक खाता के इस्तेमाल के योनो कैश से पिन और ओटीपी की मदद से निकाल ली जाती थी। ठगी के पैसों को एसीसी-55 गेमिंग एप के जरिए भी ये लोग निकालते थे, जिससे ठगी में इनकी भूमिका का पता पुलिस को नहीं चल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Ravikant Jhaशॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।
परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।
करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।
विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन
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