खुलासा: एयरफोर्स के मेडिकल में हुआ फेल तो यूट्यूबर से बन गया साइबर ठग

हिन्दुस्तान, धनबाद
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गिरिडीह के बबलू कुमार और पिंटू कुमार को साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पिंटू ने यूट्यूब पर वीडियो डालकर पहले पैसे कमाए। दोनों ने एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल पर नियंत्रण हासिल किया और पैसे चुराए। उनकी गर्लफ्रेंड भी इस ठगी में शामिल थीं।

खुलासा: एयरफोर्स के मेडिकल में हुआ फेल तो यूट्यूबर से बन गया साइबर ठग

अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड के साथ साइबर ठगी में पकड़े गए गिरिडीह अहिल्यापुर पंचनटांड़ के बबलू कुमार और पिंटू कुमार ने पूछताछ में धनबाद साइबर पुलिस को कई अहम जानकारियां दी हैं। दोनों खुद साइबर ठगी करने के साथ-साथ देश के साइबर ठगों के मददगार भी थे। पिंटू कुमार साइबर ठग बनने से पहले यूट्यूब पर वीडियो डाल कर 40 से 50 हजार रुपए महीने कमा रहा था। एयरफोर्स में मेडिकल में अनफिट करार देने के बाद उसने ठगी की राह पकड़ ली। साइबर थाना की पुलिस ने छह दिनों की लगातार पूछताछ के बाद सोमवार को दोनों को जेल भेज दिया। जेल जाने से पहले रिमांड पर लिए गए पिंटू ने बताया कि 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वर्ष 2021 में धनबाद आ गया। यहीं से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद इग्नू से अंग्रेजी विषय में स्नातक करने लगा। साथ ही आईटीआई का भी कोर्स बैंक मोड़ से कर रहा था। वह यूट्यूब पर एआई की मदद से कार्टून बनाकर प्रसारित करता था। आठ लाख सब्सक्राइबर थे। महीने में 40-50 हजार रुपए कमा लेता था। इसी बीच बचपन के दोस्त बबलू ने टेलीग्राम में ज्वाइन करने को बोला। वहां एपीके फाइल और उसका पैनल देता था। एपीके को व्हाट्सएप नंबरों पर भेज कर पैसा कमाने लगा। पिंटू ने पुलिस को बताया कि गिरफ्तारी के पूर्व तक उसने साइबर ठगी से पांच लाख रुपए कमाया था। आधा पैसा अपनी बोकारो नावाडीह भलमारा चपरी सदर टोला निवासी गर्लफ्रेंड अंजलि कुमारी पर उड़ाया था और बाकी पैसा पुलिस ने जब्त कर लिया।

पबजी खेलने में बने दोस्तों ने भेजा साइबर ठगी का वीडियो

गिरफ्तार आरोपी बबलू कुमार ने पुलिस को बताया कि मैट्रिक में उसे 89 प्रतिशत अंक मिले थे। उसका चचेरा भाई अजय मंडल और अभिषेक मंडल ने साइबर ठगी से काफी पैसा कमाया था। एक-डेढ़ साल पहले पबजी खेलने के दौरान ऑनलाइन कुछ लोगों से उसकी दोस्ती हो गई। उन्हीं लोगों ने टेलीग्राम पर साइबर ठगी से जुड़े गई वीडियो भेजे। उसने वीडियो से ठगी में इस्तेमाल एपीके का कोडिंग बदल कर नया एपीके फाइल बनाना सीखा।

एपीके डाउनलोड करनेवालों के मोबाइल को बनाते थे हथियार

बबलू ने बताया कि टेलीग्राम पर अमन उर्फ अमन मेहरा नाम से एक यूजर उसे पुराना एपीके फाइल भेजता था। कोडिंग में हल्का बदलाव कर नया एपीके फाइल बना कर उसे डाटाबेस पर देखने के लिए कंट्रोल पैनल या एडमिन पैनल बनाता था। जैसे ही कोई उसके बनाए एपीके को डाउनलोड करता था उसका पूरा मोबाइल का संचालन (एक्सेस) कंट्रोल पैनल के जरिए उसके पास आ जाता था। इसके बाद वह एपीके डाउनलोड करने वाले मोबाइल के व्हाट्सएप के जरिए उनके कांटैक्ट नंबरों पर एपीके को भेजता था। एपीके डाउनलोड होते ही संबंधित मोबाइल का कॉल फार्वर्डिंग एक्सेस और एसएमएस फार्वर्डिंग एक्सेस ठग के पास चला जाता था। इसकी मदद से उस नंबर से बैंक एकाउंट का यूपीआई एकाउंट खोल कर पांच-पांच हजार रुपए के किस्त में बैंक खाली कर दिया जाता था। एसएमएस फार्वर्डिंग के कारण ठगे जाने वाले व्यक्ति को कुछ पता भी नहीं चलता था।

दोनों की गर्लफ्रेंड भी भेजती थी एपीके फाइल

बबलू ने पुलिस को बताया कि भागलपुर सनहौला लक्ष्मीपुर की चांदनी कुमारी उसकी गर्लफ्रेंड है। वह उसकी के साथ रहती थी। उसके मोबाइल से चांदनी भी एपीके फाइल को विभिन्न नंबरों पर भेजती थी। साथ ही पिंटू की गर्लफ्रेंड अंजलि भी एपीके फाइल को वायरल करती थी। दोनों साइबर ठगी के पैसों से अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौज-मस्ती कर रहे थे। बबलू ने बताया कि वह अपने चचेरे भाई अभिषेक मंडल और अजय मंडल के जरिए भी एपीके फाइलों को दूसरे नंबरों पर भिजवाते थे। आरटीओ चालान, गैस एडवांस बुकिंग, व्हाट्सएप, बीओआई, एम परिवहन, एचडीएफसी, पीएनबी और एसबीआई आदि नाम से कोडिंग कर वह एपीके फाइल बनाता था। बबलू टेलीग्राम पर शैडो पैनल के नाम से फेमस है। उसने बताया कि एपीके और कंट्रोल पैनल को वह 15 हजार रुपए में साइबर ठगों को बेच देता था।

दो लैपटॉप और दो मोबाइल में छिपा है साइबर ठगी का राज

रिमांड पर लिए गए बबलू और पिंटू की निशानदेही पर पिंटू के किराए के मकान से पुलिस ने दो लैपटॉप और एक मोबाइल जब्त किया है। पुलिस सभी लैपटॉप और मोबाइल को खंगाल रही है। पुलिस लैपटॉप और मोबाइल के तकनीकी पक्ष को समझने के लिए केंद्रीय एजेंसी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एक्सपर्ट की भी मदद ले रही है। दोनों ने बताया कि लैपटॉप में उनके द्वारा कोडिंग कर फैलाए गए सभी एपीके फाइलों का कंट्रोल पैनल है।

सामान्य प्रश्न

बबलू और पिंटू ने साइबर ठगी से कितना पैसा कमाया?
पिंटू ने साइबर ठगी से पांच लाख रुपए कमाए थे।
Ravikant Jha

लेखक के बारे में

Ravikant Jha

शॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।


परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।


करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।


विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन

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