Hindi NewsJharkhand NewsDhanbad NewsCoal India Partners with Duke University for Critical Minerals Mining and Development
ड्यूक विवि व कोल इंडिया में तकनीक सहयोग पर मंथन

ड्यूक विवि व कोल इंडिया में तकनीक सहयोग पर मंथन

संक्षेप:

कोल इंडिया ने ड्यूक विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और विकास पर चर्चा की। यह सहयोग भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने, लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की खोज और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर केंद्रित है। कोल इंडिया ने विभिन्न संगठनों के साथ समझौते किए हैं और ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैश्विक विस्तार पर जोर दे रही है।

Jan 15, 2026 02:12 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
share Share
Follow Us on

धनबाद, विशेष संवाददाता। क्रिटिकल मिनरल के खनन, व्यावसायिक विकास और माइन क्लोजर जैसे मुद्दों पर ड्यूक विश्वविद्यालय से कोल इंडिया तकनीक सहयोग पर बात कर रही है। ड्यूक विवि का प्रतिनिधिमंडल कोल इंडिया चेयरमैन से मिला और विस्तार से बात हुई। कोल इंडिया की ओर से कहा गया कि भविष्य की रणनीति और सतत खनन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है। कोल इंडिया क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सक्रिय है, जिसके तहत उसने आईआरईएल, हिन्दुस्तान कॉपर और मध्य प्रदेश सरकार आदि के साथ एमओयू (समझौते) किए हैं, ताकि दुर्लभ मृदा तत्व, लिथियम, कोबाल्ट जैसे खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखला विकसित की जा सके और विदेशों में खदानें भी अधिग्रहित की जा सकें, ताकि स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

जानकार बताते हैं कि ड्यूक विवि को माइनिंग सेक्टर में विशेषज्ञता है। मालूम हो कि कोल इंडिया कोयला खनन से आगे बढ़कर विविधीकरण के तहत गैर-कोयला क्षेत्र जैसे क्रिटिकल मिनरल (लिथियम, ग्रेफाइट, कोबाल्ट), सौर ऊर्जा, और कोयला गैसीकरण में तेजी से विस्तार कर रही है, जिसके लिए विदेश में संपत्तियां हासिल करने और संयुक्त उद्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। कंपनी ने इन क्षेत्रों में बड़े निवेश की योजना बनाई है और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक भागीदारी कर रही है। क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्र में कोल इंडिया की पहल आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड: खनिज रेत और दुर्लभ मृदा तत्वों के विकास, खनन, और प्रसंस्करण क्षमताओं के निर्माण के लिए समझौता किया है। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड : तांबा और अन्य महत्वपूर्ण खनिज के क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। मध्य प्रदेश सरकार: ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है, जैसे खट्टली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का विकास। खोज और विकास: ग्रेफाइट: मध्य प्रदेश के खट्टली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण, जो नीलामी के तहत किसी पीएसयू को मिली पहली महत्वपूर्ण खनिज संपत्ति है, तकनीकी क्षमता वृद्धि: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनएमडीसी के तहत) (एनएफटीडीसी) के साथ महत्वपूर्ण खनिज प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया है। वैश्विक विस्तार और आत्मनिर्भरता - विदेशों में खदानों के अधिग्रहण और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर। - लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना। अनुसंधान और नवाचार आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्रिटिकल मिनरल के माध्यम से तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना और आरएंडडी को बढ़ावा देना। लक्ष्य: भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना। - इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करना। - कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य