सावित्रीबाई फुले की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन
सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती पर एडवा सिंदरी नगर कमेटी ने श्रद्धांजलि सभा और विचार गोष्ठी का आयोजन किया। वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के लिए क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने 1848 में भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला, जब लड़कियों की शिक्षा को गलत माना जाता था।

सिंदरी, प्रतिनिधि। महिला शिक्षा सम्मान और अधिकार की अलख जगाने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 195 वीं जयंती पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) सिंदरी नगर कमेटी की ओर से सेवेन लेक रोहड़ाबांध में शनिवार को श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। महिलाओं देवी सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा आज का दिन महिला शिक्षा के लिए क्रांति का दिवस है। सावित्रीबाई फुले ने उस समय पर महिला शिक्षा का संकल्प लिया। जब लड़कियों की शिक्षा को पाप माना जाता था। जब एक महिला का स्कूल जाना समाज के खिलाफ विद्रोह माना जाता था।
सावित्रीबाई फुले ने 1848 में भारत का पहला बालिका विद्यालय की स्थापना की। विद्यालय पढ़ाने जाने पर उनको गाली दी जाती थी। पत्थर फेंकने के साथ कीचड़ उछाले जाते थे। लेकिन सावित्रीबाई फुले रुकी नहीं। सावित्री बाई फूले और फ़ातिमा शेख़ ने मिलकर महाराष्ट्र के इलाके में लड़कियों का पहला स्कूल खोला और इसका बहुत सकारात्मक असर इस इलाके में दिखा। बड़ी संख्या में लड़कियां पढ़ने स्कूल जाने लगी। उन्हीं का संघर्ष का परिणाम है कि आज बेटियां डॉक्टर इंजीनियर और ऑफिसर बन रही है। कार्यक्रम में वरिष्ठ एडवा नेत्री रानी मिश्रा, समाजसेवी अनामिका तिवारी, नगर अध्यक्ष सविता देवी, कोषाध्यक्ष रंजू प्रसाद ने अपना वक्तव्य रखा। श्रद्धांजलि सभा में क्रांति मोदक, रूबी तंतुबाई, चंपा देवी, सोनाली मोदक, चंपा मोदक आदि उपस्थित थी।

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