उप डाकपाल प्रभात रंजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की एफआईआर
धनबाद के प्रधान डाकघर में पदस्थ प्रभात रंजन के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति की प्राथमिकी दर्ज की है। पिछले साल 12 फरवरी को उन्हें घूस लेते पकड़ा गया था। जांच में उनकी संपत्ति 91.36 लाख रुपये अधिक पाई गई है, जबकि उनके परिवार की आय 75.47 लाख रुपये थी।

धनबाद, मुख्य संवाददाता धनबाद के प्रधान डाकघर के सेंट्रलाइज्ड डिलीवरी ऑफिस में पदस्थापित प्रभात रंजन की मुश्किलें फिर एक बार बढ़ गई हैं। धनबाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रभात रंजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की प्राथमिकी दर्ज की है। पिछले साल 12 फरवरी को सीबीआई की टीम ने प्रभात रंजन को ग्रामीण डाक सेवक से 30 हजार रुपए घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कोयला नगर बीसीसीएल टाउनशिप डाकघर में पदस्थापित सब पोस्ट मास्टर प्रभात रंजन ने गोविंदपुर केके पॉलीटेक्निक उप डाकघर के ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) कुसुम विहार निवासी अमन कुमार को मल्टी टास्क स्टाफ (एमटीएस) बनाने के एवज में रिश्वत ले रहे थे।
नौ मई 2025 को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रभात जेल से बाहर आए। जेल से निकलने के बाद उनकी पोस्टिंग सेंट्रलाइज्ड डिलीवरी ऑफिस में की गई। फिलहाल वहीं वे अपनी सेवा दे रहे हैं। बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा राशि के साथ जमीन और गाड़ियों के रूप में उनकी संपत्ति का आकलन किया गया है। --- आय से 91.36 लाख मिली अधिक संपत्ति एक जनवरी 2015 से 13 फरवरी 2025 के बीच की प्रभात रंजन के पूरे परिवार की संपत्ति की विस्तृत जांच की गई। जांच में उनकी पारिवारिक आय से 91 लाख 36 हजार 830 रुपए की संपत्ति अधिक पाई गई। सीबीआई ने प्रभात रंजन की स्वर्गीय पत्नी, बड़े पुत्र सिंदरी हर्ल में कार्यरत और देहरादून में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छोटे पुत्र के नाम की संपत्ति की जांच की। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि एक जनवरी 2015 को प्रभात की संपत्ति महज 1.06 लाख रुपए थी। 13 फरवरी 2025 को यह बढ़ कर 96 लाख 73 हजार 794 रुपए हो गई। जांच की अवधि में उन्होंने 95.67 लाख रुपए की संपत्ति अर्जित की, जबकि उस अवधि में उनके पूरे परिवार की कमाई 75.47 लाख रुपए ही थी। सीबीआई के अनुसार इस अवधि में उनका अनुमानित खर्च 71.16 लाख रुपए होनी चाहिए थी। इस आधार पर जनवरी 2015 से फरवरी 2025 के बीच उनकी बचत 4.30 लाख हुई। जांच के अनुसार इस अंतराल में उन्होंने 95.67 लाख रुपए की अकूत संपत्ति बना ली। --- 38 साल पहले पोस्टमैन से शुरू किया था कॅरियर प्रभात रंजन ने 18 जुलाई 1987 को बतौर पोस्टमैन (डाकिया) के रूप में डाक विभाग में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। चार मार्च 1996 को वह पोस्टल असिस्टेंट बने। 18 अगस्त 2016 तक वह धनबाद हेड ऑफिस में पोस्टल असिस्टेंट के रूप में पदस्थापित रहे। 19 अगस्त 2016 को उनका स्थानांतरण बीसीसीएल टाउनशिप उप डाकघर में किया गया। यहीं उनका लोवर सेलेक्शन ग्रेड में प्रमोशन भी हुआ। फिर वह 25 जनवरी 2021 से 19 जून 2024 तक नया बाजार उप डाकपाल में कार्यरत थे। इसके बाद फिर बीसीसीएल टाउनशिप में उनका दोबारा ट्रांसफर किया गया था। 12 फरवरी 2025 को इसी पद पर रहते वे रिश्वत लेते सीबीआई के हत्थे चढ़ गए।

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