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11 जनवरी, 2021|10:47|IST

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बीसीसीएल को खर्च घटाने की नहीं, आय बढ़ाने की जरूरत : अग्रवाल

बीसीसीएल को खर्च घटाने की नहीं, आय बढ़ाने की जरूरत : अग्रवाल

धनबाद विशेष संवाददाता

बीसीसीएल के पुनरुद्धार पर सोमवार को आयोजित बैठक में कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि बीसीसीएल को कोल इंडिया या किसी अन्य कंपनी से मदद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। आर्थिक मदद की एक सीमा होती है। बीसीसीएल को स्वयं अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर है। यह संभव भी है। इसपर विस्तार से विचार किया गया। चालू वित्तीय वर्ष में 30 मिलियन टन कोयला उत्पादन और डिस्पैच करने में कंपनी सफल हो जाती है तो घाटे में नहीं रहेगी। बीसीसीएल को खर्च घटाने की नहीं, बल्कि आय बढ़ाने पर जोर देना होगा। खर्च घटाने से आय नहीं बढ़ती। सोमवार को कोयला नगर अतिथि गृह में कोल इंडिया चेयरमैन ने यह बात कही।

बीसीसीएल सीएमडी गोपाल सिंह, निदेशक तकनीक (ऑपरेशन) राकेश कुमार एवं निदेशक वित्त समीरन दत्ता सहित महाप्रबंधकों की मौजूदगी में बीसीसीएल की समीक्षा बैठक हुई।

मौके पर बीसीसीएल की ओर से तैयार किए जा रहे रिवायवल प्लान पर भी मंथन हुआ। 10-15 मिलियन टन क्षमता की सात परियोजनाओं को शुरू कर बीसीसीएल को सौ मिलियन टन की कंपनी बनाया जा सकता है। इसपर कंपनी प्रबंधन विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रही है। छह डिपार्टमेंटल प्रोजेक्ट की भी योजना है ताकि सरप्लस मैनपावर को मुकम्मल काम मिले सके।

2000 करोड़ कर्ज, 3500 करोड़ बकाया

बीसीसीएल पर फिलहाल बैंक का दो हजार करोड़ कर्ज है। वहीं बीसीसीएल का विभिन्न बिजली सहित अन्य कंपनियों पर 3500 करोड़ कोयले का बकाया है। बकाया कि कुल रकम 3800 करोड़ है, जिसमें 300 करोड़ पर मात्रा व गुणवत्ता आदि को लेकर क्लेम संभव है। मामले पर कोल इंडिया चेयरमैन ने कहा कि बकाया रकम मिल जाने पर बीसीसीएल में आर्थिक संकट फिलहाल खत्म हो जाएगा। इसके बाद आगे की योजना पर काम शुरू करने की जरूरत है।

झरिया पुनर्वास जरूरी

कोल इंडिया चेयरमैन ने झरिया पुनर्वास को जरूरी बताया। कहा कि कैसे लोगों फायर एरिया से हटाना और सुरक्षित पुनर्वास करना है, इसपर जोर देना है। वैसे इसके लिए संबंधित एजेंसिया अपेक्षित काम कर रही हैं। झरिया पुनर्वास पर और कुछ ज्यादा बोलने से चेयरमैन बचते दिखे।

सीबीएम प्रोजेक्ट निकट भविष्य में संभव

कोल इंडिया चेयरमैन ने कहा कि बीसीसीएल में सीबीएम दोहन के लिए पूर्व में टेंडर हुआ था, लेकिन किसी कंपनी ने भाग नहीं लिया। इस बार पुन: टेंडर जारी किया गया है। उम्मीद है कुछ कंपनियां सामने आएंगी, जो सीबीएम दोहन का काम करेंगी।

चेयरमैन ने पुनरुद्धार के रोडमैप बताए

-- लिंकेज भूल जाइए, ई-ऑक्शन की बात कीजिए : कोयले के लिंकेज की बात पुरानी हो गई। अब हर महीने ई-ऑक्शन होगा। ऑक्शन में जितना कोयला चाहिए, उतना मिलेगा। इसलिए लिंकेज की बात न करें

-- बिजली कंपनियों पर निर्भरता कम होगी : बीसीसीएल को बिजली कंपनियों पर निर्भरता कम करनी होगी। बढ़िया ग्रेड का कोयला है तो उद्यमी, ट्रेडर सहित अन्य कोयला आधारित उद्योग पर ध्यान देना है

-- वाश कोल एवं वाशरी पर जोर : वाशरियों की क्षमता बढ़ाने तथा वाश कोयले का उत्पादन बढ़ा बीसीसीएल स्टील सेक्टर को कोयला आपूर्ति पर जोर देगी। बीसीसीएल के रहते स्टील सेक्टर आयातित कोयला क्यों लें

-- कोयले के प्रीमियम में रियायत : बीसीसीएल में कोयले का बेसिक दाम ज्यादा नहीं। प्रीमियम कुछ ज्यादा है, जिसे कम किया गया है और आगे भी इसपर विचार किया जाएगा। फिलहाल प्रीमियम में 15% तक कटौती की गई है

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  • Web Title:BCCL not to reduce expenditure but need to increase income Aggarwal