बीबीएमकेयू : 77 करोड़ का फर्नीचर व उपकरण विवाद सलटने का आसार
अगर सबकुछ ठीक रहा तो बीबीएमकेयू धनबाद में छात्र-छात्राओं को 77 करोड़ रुपए से लैब और लाइब्रेरी की सुविधा मिल सकती है। कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी ने सहमति दी कि आवश्यक फर्नीचर और उपकरणों की आपूर्ति जल्द की जाएगी। प्रस्ताव रांची भेजा जाएगा और उम्मीद है कि मार्च के अंत या अप्रैल में आपूर्ति शुरू होगी।

अगर सबकुछ ठीक रहा तो बीबीएमकेयू धनबाद मेन कैंपस में आने वाले दिनों में 77 करोड़ रुपए से लैब व लाइब्रेरी की सुविधा छात्र-छात्राओं को मिल सकती है। गुरुवार को कुलपति प्रो. रामकुमार सिंह की अध्यक्षता में विवि के सभी अधिकारियों, डीन व विभागाध्यक्षों की बैठक हुई। कई घंटे तक चली बैठक में डीपीआर से लेकर अब तक की प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। सभी ने इसपर सहमति दी है कि डीपीआर में जिस साइज व स्पेसिफिकेशन है, उसका पालन किया जाए। जल्द ही इससे संबंधित प्रस्ताव राज्य मुख्यालय को भेजा जा सकता है। हालांकि मामले में कोई अधिकारी कुछ भी बोलने से हिचक रहे हैं।
बताते चलें कि ब्रांड के चक्कर में पिछले डेढ़-दो साल से पुस्तकालय के लिए फर्नीचर व प्रयोगशाला के लिए फर्नीचर व उपकरण की आपूर्ति नहीं हो पाई है। डीपीआर में एक ही ब्रांड का जिक्र है। राज्य मुख्यालय ने किसी अन्य ब्रांड के लिए एग्रीमेंट कर लिया। इस कारण लंबे समय से फेंकाफेंकी हो रही है। 26 फरवरी को रांची में बैठक हुई। बैठक से संबंधित पत्र पहुंचने के बाद गुरुवार को बीबीएमकेयू में बैठक हुई। बैठक में सहमति बनी कि फर्नीचर व उपकरण जरूरी है। ब्रांड नहीं लेकिन जो साइज व अन्य स्पेसिफिकेशन है। उससे संबंधित ही फर्नीचर की आपूर्ति की जाए। अब इससे संबंधित पत्र रांची जाएगा। रांची में मुहर लगने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल में फर्नीचर व उपकरणों की आपूर्ति शुरू हो। अब सभी का ध्यान रांची पर है।
लेखक के बारे में
Amit Wattsशॉर्ट बायो: अमित वत्स पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा का कवरेज कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
अमित वत्स पत्रकारिता जगत में जाना पहचाना नाम हैं। पत्रकारिता में 23 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण में एजुकेशन व रोजगार से जुड़े बीट की रिपोर्टिंग करते हैं। एजुकेशन बीट पर मजबूत पकड़ है।
करियर का सफर
अमित ने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण से की। बहुत ही कम समय में प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। प्रारंभिक वर्षों में ही एजुकेशन बीट पर पकड़ बनाई। वर्ष 2009 में हिन्दुस्तान से जुड़े। उसके बाद पिछले 16 वर्षों से हिन्दुस्तान में शिक्षा समेत अन्य बीट का नेतृत्व कर रहे हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए भी लगातार खबरें लिख रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्टभूमि और एजुकेशन रिपोर्टिंग
बीएड, एमए एजुकेशन के साथ ही मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई का लाभ अमित को एजुकेशन बीट की रिपोर्टिंग में मिला। इसकारण एजुकेशन बीट पर कमांड होने के साथ ही आईआईटी धनबाद, यूनिवर्सिटी शोध की खबरें, वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने व एक्सक्लूसिव स्टोरी लिखते हैं।
शिक्षा और रोजगार
शिक्षा को सीधे आर्थिक अवसरों और रोजगार से जोड़ने पर केंद्रित विश्लेषण समेत अन्य एक्सक्लूसिव खबरें लिखी है। शिक्षा से संबंधित खबरों पर अमित की गहरी समझ है। अमित का मानना है कि तथ्य आधारित व विश्वसनीयता पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है। पाठकों को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए। रिपोर्टिंग में विशेषकर छात्र केन्द्रित दृष्टिकोण जरूरी है।
विशेषज्ञता
- नई शिक्षा नीति कैसे बदल रही है
- प्रतियोगिता परीक्षाओं के अपडेट
- छात्रों के लिए तनावमुक्त तैयारी
- बोर्ड परीक्षाओं जैक, सीबीएसई, आईसीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया व रिजल्ट का विश्लेषण
- कौशल विकास आधारित शिक्षा
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