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बंसी बाजे रे, कृष्ण संग राधा नाचे रे...

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1 / 3बंसी बाजे रे, कृष्ण संग राधा नाचे रे...गीतों पर श्रोता झुमते दिखे। मौका था कुम्हारपट्टी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार...

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बंसी बाजे रे, कृष्ण संग राधा नाचे रे...गीतों पर श्रोता झुमते दिखे। मौका था कुम्हारपट्टी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार का। साथ पंडित गिरधारी शरण शास्त्री ने महारास लीला, रूकमणी-कृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि जगत के कल्याण के लिए सनातन धर्म आधार स्तंभ है, वहीं भागवत सनातन धर्म का आधार है। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और मन पवित्र तो चरित्र, जीवन भी पवित्र होता है। उन्होंने श्रीकृष्ण रासलीला आदि की कथाओं का बड़े ही सुंदर ढंग से वर्णन किया।

मन में बैठे कंस को मारने की जरूरत

कथावाचक ने कहा कि आज हमें मन में बैठे कंस को मारने की जरूरत है। जिन लोगों के विचार, व्यवहार, चरित्र आचरण आदि गलत होते हैं उन्हें हमेशा हार का मुंह देखना पड़ता है। मनुष्य को जीवन का मकसद मालूम होना चाहिए तथा उसके बाद लक्ष्य बनाकर उसे प्राप्त करने के लिए कर्म करना चाहिए। मनुष्य यदि कामना रूपी नाग को वश में कर ले तो जीवन धन्य हो जाएगा।

जीवात्मा का परमात्मा से मिलन

महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आव्हान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। हमारे अंदर प्रतिक्षण रास हो रहा है, सांसे चल रही है तो रास भी चल रही है, यही रास महारास है।

कृष्ण-रुकमणी विवाह

भागवत कथा में कृष्ण-रुकमणी विवाहोत्सव मनाया गया। जैसे रूकमणीजी कथा मंच के सामने बने मंच पर सखियों सहित प्रकट हुईं तो सत्संग हॉल भाव विहल हो उठा। रूकमणीजी की झांकी देखकर कथा में बैठे भक्त इस अलौकिक दृश्य को देख धन्य हो गए। श्रीकृष्ण-रूक्मणी की वरमाला पर जमकर फूलो की बरसात हुई। जयकारों से पूरा सत्संग हॉल गूंज उठा।

प्रभु की भक्ती में लीन रहे भक्त

कथा में भजन गाने पर पूरे सत्संग हॉल का मौहाल बदल गया और सभी भक्त झूम उठें, भक्तो को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मानों सब खुद से दूर होकर प्रभु में लीन हो गये हो |

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