
पुलिस प्रशासन और कोयला माफिया की सांठगांठ से अवैध खनन : बाबूलाल
धनबाद के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने अवैध कोयला खनन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से धनबाद में खनन हो रहा है। इस पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।...
धनबाद, विशेष संवाददाता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में कोयले के अवैध खनन पर जमकर हमला बोला। कहा कि राज्य सरकार के संरक्षण में पुलिस प्रशासन और कोयला माफिया की सांठगांठ से धनबाद में कोयले का अवैध खनन हो रहा है। लगातार घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जान जा रही है। झारखंड सरकार इस पर त्वरित कार्रवाई करे। उक्त बातें मरांडी ने केशलपुर, मुंडाधौड़ा में भू-धंसान पर मंगलवार को परिसदन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं। उन्होंने कहा कि मुंडाधौड़ा के दौरे के दौरान लोगों ने कई ऐसे वीडियो दिखाए, जिसमें कोयले का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है।
कोई रोकने वाला नहीं है। कह सकते हैं कि धनबाद में पिछले दिनों घटी घटना में जिन सात लोगों की मौत हुई, वह प्राकृति आपदा नहीं कृत्रिम है। अवैध खनन से इस तरह की स्थिति तैयार की गई है। मामले पर कोल इंडिया के अफसरों से बात की तो बताया गया कि लोकल पुलिस प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता है। मरांडी बोले कि यह गंभीर मामला है। इस पर त्वरित कार्रवाई हो। हर दिन धनबाद से 500 से अधिक ट्रक चोरी का कोयला बाहर भेजा जाता है। कोयला चोरी में चाहे जो भी संलिप्त हैं, सरकार की जिम्मेदारी है कि उसके खिलाफ कार्रवाई करे। बाबूलाल ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा आंदोलन करेगी। मौके पर श्रवण राय, धनश्याम ग्रोवर, सरोज सिंह, रमेश राही, मानस प्रसून, रुपेश सिन्हा, पंकज सिन्हा, सत्येंद्र मिश्रा, बीरेंद्र हांसदा, अजय निषाद, योगेंद्र यादव समेत कई भाजपा के नेता-कार्यकर्ता मौजूद थे। रोहिंग्या को बसा रहे, भू-धंसान प्रभावितों में क्या दिक्कत मरांडी ने कहा कि मुंडाधौड़ा में भू-धंसान की चपेट में आए लोगों का जल्द पुनर्वास हो। झारखंड सरकार रोहिंग्या को बसा रही है। भू-धंसान प्रभावितों को बसाने में क्या दिक्कत है। 50 साल से लोग रह रहे हैं। वैध या अवैध जो भी हैं, राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि उनका सुरक्षित पुनर्वास हो। लोग जान चाह रहे हैं। मुंडा धौड़ा में मंदिर, स्कूल सबकुछ है। यह संकेत है कि लोग वर्षों से रह रहे हैं। बीसीसीएल की खाली जमीन में भू-धंसान प्रभावितों को बसाया जाए।

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