
बलियापुर में जिलास्तरीय कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना एक बड़ी उपलब्धि
बलियापुर में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 2007 में उद्घाटन के बाद, यह केन्द्र किसानों को नई तकनीक और प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। यहां प्रतिवर्ष हजारों किसानों को कृषि में नवाचारों का लाभ मिलता है, जिससे कृषि में उल्लेखनीय विकास हुआ है।
संतोष कुमार महतो बलियापुर। बलियापुर में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना कृषि के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो रही है। 2007 में इसका उद्घाटन झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम सैयदसिब्ते रजी ने किया। मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिले के आला अधिकारियों व किसानों के अलावे बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ0 एनएन सिंह भी मौजद थे। उन दिनों वरीय वैज्ञानिक डॉ0 देवकांत प्रसाद कृषि विज्ञान केन्द्र के समन्वयक रहे। बीज प्रसंस्करण, मिट्टी जांच केन्द्र, मशरूम उत्पादन, टिसु कल्चर, सिलाइ-कढ़ाइ प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग युनिट, वर्मी कंपोस्ट, मातृत्व पौधा, टेक्नोलॉजी पार्क आदि सहित बारह युनिटों के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र का संचालन शुरू हुआ।

यहां प्रतिवर्ष दो से ढ़ाइ हजार किसानों को कृषि की नइ तकनीक पर प्रशिक्षण दिया जाता है। लोगों का कहना है कि कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों को एक नइ दिशा दी। कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना के इन 18 वर्षों में कृषि के क्षेत्र में काफी विकास हुआ है। किसानों की समस्याओं का अध्ययन कर उस पर काम करना ही कृषि विज्ञान केन्द्र का उद्येश्य है। क्या कहते हैं प्रभारी कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी वरीय वैज्ञानिक डॉ0 अनिल कुमार का कहना है कि किसानों को कृषि की नइ तकनीकी से अवगत कराने के साथ उन्हें इस दिशा में प्रशिक्षण दे इस दिशा में जमीनी स्तर पर काम करना ही केन्द्र का उद्येश्य है। इसके माध्यम से उत्पादन के बढ़ावा भी दिया जाता है। फिलहाल यहां चार वैज्ञानिकों के अलावे एक फार्म मैनेजर, एक ट्रेनिंग सहायक व आठ संविदाकर्मी कार्यरत है।

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